जींद। जिला मत्स्य अधिकारी दिलबाग सिंह ने बताया कि मत्स्य विभाग अनुसूचित जाति के परिवारों को विभिन्न प्रकार से लाभ पहुंचा रहा है। यदि कोई अनुसूचित जाति का व्यक्ति पंचायती तालाब को पट्टे पर लेकर मत्स्य पालन करता है, तो उसे प्रथम वर्ष व्यय की गई वास्तविक पट्टा राशि का अधिकतम एक लाख अनुदान के रूप में दिया जाता है। इसके बाद मत्स्य किसान को हर वर्ष व्यय की गई राशि का 25 प्रतिशत अनुदान पांच वर्षों तक दिया जाता है। इसके अतिरिक्त किसान को मत्स्य जालों की खरीद पर खर्च की गई अधिकतम राशि 40 हजार रुपये का 60 प्रतिशत अनुदान के रूप में दिया जाता है।
इसके अतिरिक्त पंचायती तालाबों पर खाद खुराक पर कुल लागत का एक लाख 50 का 60 प्रतिशत अनुदान के रूप में दिया जाता है। मत्स्य गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए विभाग वर्ष 2024-25 अनुसूचित जाति के परिवारों को मछली एवं मछली उत्पाद की बिक्री के लिए रेहड़ी, स्टोव, गैस चूल्हा, बर्तन आदि पर अनुदान प्रदान करने का प्रावधान किया है।