जाट आरक्षण आंदोलन के बाद अब एससी ए वर्ग के लोग भी आरक्षण की बहाली को लेकर आंदोलन की राह पर आ गए हैं। एससी ए वर्ग के लोगों ने 13 फरवरी से लघु सचिवालय के सामने धरना देने की तिथि निर्धारित की है, लेकिन प्रशासन ने अब तक इसके लिए अनुमति नहीं दी है। एससी ए वर्ग के लोगों का कहना है कि अगर प्रशासन ने उनको धरने की अनुमति नहीं दी तो भी वे सोमवार से लघु सचिवालय के बाहर धरने पर बैठेंगे।
एससी ए वर्ग के अध्यक्ष देवीदास ने कहा कि सरकार व प्रशासन उनकी आवाज को दबाना चाहते हैं। पहले प्रशासन ने उनके 21 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज कर दबाने का प्रयास किया, लेकिन प्रशासन की इस कार्रवाई से एससी ए वर्ग के लोग डरने वाले नहीं हैं। धरने की अनुमति लेने के लिए सात फरवरी को शहर थाने में प्रार्थना पत्र दिया था, लेकिन आज तक प्रशासन ने उनको अनुमति नहीं दी है। उन्होंने कहा कि प्रशासन जाटों को धरने की अनुमति दे रहा है, लेकिन वे अपने अधिकारों के लिए धरना दे रहे हैं तो प्रशासन अनुमति नहीं दे रहा।
इन मांगों को लेकर होगा धरना
देवीदास ने बताया कि संविधान के अनुसार दलित वर्ग को 20 प्रतिशत आरक्षण दिया हुआ है। दलित ए वर्ग के अंतर्गत आने वाली 42 जातियों को दस प्रतिशत अलग से मिलना चाहिए और यह उनका संवैधानिक अधिकार है। दलित ए वर्ग की आरक्षण की मांग को विधानसभा में पारित करने का वादा भाजपा ने अपने चुनावी घोषणा पत्र में शामिल किया था, लेकिन ढाई साल से ज्यादा समय बीत जाने के बाद भी सरकार इस पर कोई ध्यान नहीं देर ही है। अब सीएम मामला सुप्रीम कोर्ट में होने की बात कहकर इसे टाल रहे हैं।