उचाना। सावन माह में लाला प्रभुदयाल चौधरी धर्मशाला में प्रवचन करते हुए राधा-कृष्ण मंदिर पुजारी सत्यनारायण शांडिल्य ने कहा कि भगवान महादेव की आराधना का पावन मास श्रावन मास भगवान महादेव को अतिप्रिय है। भगवान शिव जैसा कृपालु-दयालु कोई दूसरा देव नहीं है। जल, दूध, वेलपत्र, भांग, धतूरा चढ़ाने व साष्टांग प्रणाम करने मात्र से ही ये प्रसन्न होकर मनोवांछित फल प्रदान कर देते हैं।
भगवान महादेव स्वयं अभाव में रहते हुए भी भक्तों के अभावों को हरने वाले हैं। आशुतोष भगवान महादेव की अल्प आराधना भी रंक को राजा बना देती है। उन्होंने कहा कि बिना विष को पिये और विषमता को पचाए कोई भी महान नहीं बन सकता है। देवाधिदेव भगवान महादेव का इस श्रावण मास में पूजन करते हुए उनके पावन जीवन चरित्र से बहुत कुछ सीखने और समझने योग्य है। जो अमृत पीते हैं वो देव बनते हैं व जो राष्ट्र, समाज और प्रकृति की रक्षा के लिए विष को भी प्रेम से पी जाए वह महादेव बन जाते हैं। भगवान महादेव का जीवन बताता है कि मनुष्य के संकल्प के सामने बड़ी से बड़ी चुनौती भी छोटी हो जाती है बस हमें चुनौती से लड़ना आ जाए।