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सावन ज्ञान, धर्म और भक्ति का मूल है : राजेश

Thu, 07 Aug 2025 01:34 AM IST
रोहतक ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, जींद
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06जेएनडी27-हनुमान मंदिर में शिवपुराण कथा सुनाते हुए कथा वाचक राजेश शर्मा। स्रोत श्रद्धालु
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जींद। सफीदों रोड स्थित हनुमान मंदिर में चल रही शिवपुराण कथा का बुधवार को समापन हुआ। कथा वाचक पुजारी राजेश शर्मा ने कहा कि महापुराण की कथा के अंतिम दिन का मुख्य सार अहंकार त्यागने, भक्ति और ज्ञान का महत्व समझाने और जीवन में सुख, समृद्धि व मोक्ष की प्राप्ति पर केंद्रित होता है। उन्होंने कहा कि शिव महापुराण का श्रवण ज्ञान, धर्म और भक्ति का मूल है।
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उन्होंने कहा कि अहंकार को तूफान के समान बताया जाता है जो बड़ी-बड़ी हस्तियों को डुबो देता है। इसलिए मनुष्य को कभी भी अहंकार नहीं करना चाहिए। कथा का उपदेश होता है कि मन को निर्मल, सादा और शुद्ध रखें, क्योंकि मन को देखने वाला ही सक्षम होता है। सच्ची शिव भक्ति से व्यक्ति को जीवन के सभी कष्ट और पापों से मुक्ति मिलती है और उसे मोक्ष प्राप्त होता है।
भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों के दर्शन या उनके नाम लेने मात्र से ही भक्तों के सभी दुख दूर हो जाते हैं। भगवान शिव को प्रिय रुद्राक्ष का महत्व भी बताया जाता है। शिव की भक्ति से व्यक्ति को सुख और समृद्धि प्राप्त होती है और सांसारिक बंधनों से मुक्ति मिलती है।

06जेएनडी27-हनुमान मंदिर में शिवपुराण कथा सुनाते हुए कथा वाचक राजेश शर्मा। स्रोत श्रद्धालु

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