हरियाणा के जींद जिले में लगातार सरपंचों के लिए भाईचारे की मिसाल कायम हो रही है। अब तक सात गांवों में सर्वसम्मति से सरपंचों का चयन किया गया है। वहीं सोमवार देर शाम को बहबलपुर गांव के लोगों ने अपने 42 साल के इतिहास को कायम रखते हुए सर्वसम्मति से अनुसूचित जाति के शिव कुमार को सरपंच घोषित कर दिया।
केवल 2016 में हुए चुनाव में सरपंच के लिए बहबलपुर गांव में वोट डाले गए थे इसके सिवाय आज तक कभी भी इस गांव में सरपंच के लिए वोट नहीं डाले गए। पिछली बार भी सर्वसम्मति बन गई थी लेकिन एक व्यक्ति ने नामांकन कर दिया जिस कारण उसे केवल अपने ही परिवार के वोट मिले थे।
पूर्व सरपंच देवेंद्र ने बताया कि गांव में 1980 से सरपंच को लेकर सर्वसम्मति बनती आ रही है। पहली बार गांव में करतार सिंह को सर्वसम्मति से सरपंच चुना गया था। मास्टर रामप्रसाद, अजीत सैनी, नत्थो देवी, रामानंद, परमानंद, भीम सिंह सैनी सभी सर्वसम्मति से सरपंच चुने गए थे। इस बार शिव कुमार को दसवीं बार सरपंच चुना गया है।
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2016 में भी देवेंद्र कुमार को ग्रामीणों ने सर्वसम्मति से सरपंच चुना था लेकिन गांव के एक अन्य व्यक्ति ने नामांकन दाखिल कर दिया। इसके बाद प्रशासन को चुनाव करवाना पड़ा। पूरे गांव में देवेंद्र के पक्ष में मतदान किया लेकिन एक परिवार के लोगों ने ही देवेंद्र के विरोध में मतदान किया। इस बार गांव में सरपंच का पद एससी पुरुष वर्ग के लिए आरक्षित था तो ग्रामीणों ने शिव कुमार को सरपंच चुन लिया।
तेजेंद्र दूहन ने बताया कि इस समाज के गांव में बहुत कम मतदाता है इसलिए इनमें सबसे काबिल का चुनाव करना बड़ा ही मुश्किल था। ग्रामीणों ने एक मत से फैसला शिव कुमार के पक्ष में किया गया। शिव कुमार आठवीं तक पढ़ा हुआ है और टैक्सी चलाता है।
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गांव में सामाजिक रूप से शिवकुमार का बड़ा योगदान है। शिवकुमार बेशक कम पढ़ा लिखा हो लेकिन उसे कार्य कैसे करवाए जाते हैं इसका पूरा ज्ञान है। ग्रामीणों को उम्मीद है कि शिव कुमार गांव में विकास कार्यों को और गति देंगे।
पंचों पर भी बन जाएगी सहमति
तेजेंद्र दूहन ने बताया कि गांव में नौ पंचों का चुनाव होता है। इनमें से भी अधिकतर पर सहमति बन चुकी है। केवल एक-दो नामों पर ही फाइनल मोहर लगनी बाकी है। गांव में पंच के लिए भी पिछली योजना के अलावा कभी मतदान नहीं हुआ। इस बार भी गांव में मतदान की नौबत नहीं आएगी।