ग्रामीण सफाई कर्मचारियों ने काली पट्टी बांधकर विरोध दिवस मनाया। उन्होेंने कहा कि सरकार की उपेक्षा का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उनको कोरोना संक्रमण से बचाव लिए अब तक मास्क, दस्ताने, सैनिटाइजर, पीपीई किट तक नहीं दिए गए। कोरोना मरीज की मौत होने पर दाह संस्कार बिना सुरक्षा उपकरणों के करवाया जा रहा है। इस काम के लिए दो हजार रुपये प्रोत्साहन राशि तक नहीं मिल रही है। जबकि शहरी सफाई कर्मचारियों को इस काम के लिए दो हजार रुपये प्रति शव के दाह संस्कार के लिए मिल रहे हैं।
उन्होेंने मांग की कि कोरोना बचाव के लिए सुरक्षा उपकरण, कर्मचारियों को कोरोना काल मे 50 लाख रुपये का बीमा कवरेज, कोरोना मृतक का दाह संस्कार करने के लिए दो हजार रुपये प्रोत्साहन राशि तथा चार अप्रैल को मुख्यमंत्री द्वारा घोषित 14 हजार रुपये वेतन का पत्र जारी करवाने की मांग को लेकर यह विरोध दिवस आयोजित किया गया है। ग्रामीण सफाई कर्मचारी यूनियन हरियाणा के नेता कृष्ण मोरखी, ईश्वर सिंह, सुल्तान, मुकेश, राजेंद्र, कपूर सिंह ने प्रदेश सरकार पर कर्मचारियों को रामभरोसे छोड़ने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि केंद्र व राज्य सरकार सफाई कर्मियों को कोरोना योद्धा की उपाधि तो दे रही है, लेकिन उनकी सुरक्षा की कोई जिम्मेदारी लेने के लिए तैयार नहीं है। इस महामारी में हर व्यक्ति अपने घर में है, लेकिन सफाई कर्मी गांव की सफाई, कोरोना केंद्रों की देखरेख, गांव को सैनिटाइज करने का काम कर रहे हैं। सरकार के फैसले के चलते गांव में कोरोना से होने वाली मौत के बाद दाह संस्कार का काम अब ग्रामीण सफाई कर्मियों से लिया जा रहा है, लेकिन इनके स्वास्थ्य व जीवन के बारे में कोई चिंता नहीं है। सरकार के इस रुख के कारण सफाई कर्मचारियों में काफी गुस्सा है। यूनियन नेताओं ने कहा कि सरकार की इस बेरुखी के खिलाफ ग्रामीण सफाई कर्मचारियों ने वीरवार को प्रदेशभर में काले बिल्ले, काली पट्टी लगाकर विरोध दिवस मनाया। उन्होंने सरकार व पंचायत विभाग को चेतावनी दी कि बिना किसी देरी के उनकी समस्याओं का समाधान किया जाए। उन्होंने कहा कि पूरे प्रदेश का ग्रामीण सफाई कर्मचारी 26 मई को अपने-अपने कार्य स्थल पर विरोध प्रदर्शन करते हुए आंदोलन को तेज कर ब्लॉक पर प्रदर्शन करने से भी गुरेज नहीं करेंगे।