जींद। नागरिक अस्पताल में 2021 में प्रधानमंत्री केयर फंड से लगा ऑक्सीजन प्लांट तीन दिन से बंद पड़ा है। प्लांट की सर्विस होनी है, लेकिन स्वास्थ्य विभाग के पास बजट नहीं है। स्वास्थ्य विभाग ने स्वास्थ्य निदेशालय से बजट की मांग की है। बजट मिलने के बाद ही प्लांट चल पाएगा। वहीं इसके बंद होने के कारण स्वास्थ्य विभाग ने पुरानी बिल्डिंग में सिलिंडरों से ऑक्सीजन की आपूर्ति शुरू कर दी है। इमरजेंसी वार्ड में भी ऑक्सीजन सिलिंडरों से काम चलाया जा रहा है।
नागरिक अस्पताल में जिन उम्मीदों के साथ ऑक्सीजन प्लांट लगाया गया था, वह पूरी नहीं हो रही हैं। दो साल में यह ऑक्सीजन प्लांट कई बार खराब हो चुका है। वहीं, यह प्लांट कभी भी किसी भी समय जवाब दे सकता है। इसलिए स्वास्थ्य विभाग ऑक्सीजन सिलिंडरों का अपना बैकअप पूरा रखता है। इस ऑक्सीजन प्लांट की क्षमता एक हजार लीटर ऑक्सीजन प्रति मिनट है। इतनी अधिक मात्रा में ऑक्सीजन से 300 बेड का अस्पताल चलाया जा सकता है, लेकिन स्वास्थ्य विभाग ने इस ऑक्सीजन प्लांट से पुरानी बिल्डिंग को ही जोड़ा है, क्योंकि उन्हें पता है कि यदि पूरे अस्पताल को इससे जोड़ा जाएगा तो यह भरोसे के लायक नहीं है। इसके अलावा स्वास्थ्य विभाग ऑक्सीजन सिलिंडरों का बैकअप पूरा रखता है।
आपातकाल के लिए पुरानी बिल्डिंग में भी 100 बेड की व्यवस्था
नागरिक अस्पताल 200 बेड का है। बेड की व्यवस्था नई बिल्डिंग में है, लेकिन स्वास्थ्य विभाग ने आपातकाल के लिए पुरानी बिल्डिंग में भी 100 बेड की व्यवस्था की गई है। पुरानी बिल्डिंग में सामान्य रोगियों को दाखिल करने की सुविधा है। पुरानी बिल्डिंग में ही इमरजेंसी वार्ड है। इमरजेंसी वार्ड व अन्य पुरानी बिल्डिंग में इस ऑक्सीजन प्लांट से ऑक्सीजन की सप्लाई होती है। जब यह ऑक्सीजन प्लांट खराब होता है तो सिलिंडरों के माध्यम से ऑक्सीजन की सप्लाई दी जाती है।
अभी तक नहीं लिया एक भी नमूना
स्वास्थ्य विभाग ने अभी तक एक भी व्यक्ति का इन्फ्लूएंजा जांच के लिए सैंपल नहीं लिया है। सैंपल लेने के लिए कुछ नियम एवं शर्तें हैं। नागरिक अस्पताल में अब तक ऐसा कोई मरीज नहीं आया, जिसका नमूना लेने की जरूरत हो। यदि ऐसा कोई मरीज आता है तो फिर उसका सैंपल लिया जाएगा।
कोट
ऑक्सीजन प्लांट की सर्विस करवाई जानी है। इंजीनियर ने इसके लिए डेढ़ लाख रुपये का खर्च बताया है। स्वास्थ्य निदेशालय से बजट मांगी गई है। जल्द ही बजट मिल जाएगा और ऑक्सीजन प्लांट शुरू कर दिया जाएगा। फिलहाल सिलिंडरों से काम चलाया जा रहा है।
-डॉ. राजेश भोला, डिप्टी एमएस।