जींद। शहद उत्पादन के क्षेत्र में हरियाणा को अग्रणी बनाने और मधुमक्खी पालकों को बाजार के उतार-चढ़ाव से बचाने के लिए प्रदेश सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। भावांतर भरपाई योजना के अंतर्गत अब शहद का संरक्षित मूल्य 120 रुपये प्रति किलोग्राम निर्धारित कर दिया है।
इससे मधुमक्खी पालकों को आर्थिक सुरक्षा मिलेगी और उनके उत्पाद का उचित मूल्य सुनिश्चित होगा। डीसी मोहम्मद इमरान रजा ने बताया कि मधुमक्खी पालन न केवल किसानों की आय का अतिरिक्त स्रोत है बल्कि यह परागण के माध्यम से फसलों की उत्पादकता बढ़ाने में भी सहायक है।
उन्होंने जानकारी दी कि योजना का लाभ लेने के लिए 1 जनवरी से 30 जून 2026 तक पंजीकरण करवाना अनिवार्य है। इच्छुक पालक मधुक्रांति पोर्टल या भावांतर भरपाई योजना पोर्टल पर आवेदन कर सकते हैं। योजना की पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए लाभार्थियों को परिवार पहचान पत्र और बैंक खाते के विवरण के साथ सत्यापन कराना होगा।
डीसी ने स्पष्ट किया कि हरियाणा की सीमा के भीतर भौतिक सत्यापन के बाद ही लाभ दिया जाएगा। उन्होंने जिला के सभी मधुमक्खी पालकों से आह्वान किया है कि वे निर्धारित समय सीमा के भीतर अपना पंजीकरण करवाकर सरकार की इस किसान हितैषी योजना का लाभ उठाएं।