जिला रेडक्रॉस सोसायटी द्वारा संचालित एकमात्र नशा मुक्ति केंद्र को प्रशासन ने बंद करने के आदेश दिए हैं। ऐसा इस केंद्र में कार्यरत कर्मचारियों की भर्ती में फर्जीवाड़ा तथा 2016-17 के बाद ग्रांट नहीं आने के कारण किया गया है। इसके अलावा इस केंद्र के परियोजना निदेशक 31 मई को रिटायर हो चुके हैं, लेकिन अब तक उनका नाम रजिस्टर में चल रहा है। इस कारण इस केंद्र में अनियमितताओं के भी आरोप हैं। इस केंद्र में कार्यरत कर्मचारियों ने केंद्र को बंद करने के लिए अधिकारियों पर तानाशाही का आरोप लगाया है।
जानकारी के लिए अर्बन इस्टेट में रेडक्रॉस सोसायटी द्वारा नशा मुक्ति केंद्र चलाया जा रहा था। वित्तवर्ष 2016-17 के बाद इस केंद्र के लिए कोई ग्रांट नहीं आई। इसके अलावा इस केंद्र में भर्ती हुए 14 कर्मचारियों की भर्ती में भी फर्जीवाड़े के आरोप लगे हैं। जिला रेडक्रॉस सोसायटी सचिव राजकपूर सूरा ने कहा कि इस केंद्र के परियोजना निदेशक दिलबाग सिंह दूहन 31 मई को रिटायर हो चुके हैं, लेकिन आज तक भी उनका रजिस्टर में नाम चल रहा है। इस केंद्र का लाइसेंस नौ मई 2017 से 26 अक्तूबर 2018 तक रिन्यू भी नहीं हुआ था। इस कारण केंद्र का कार्य बंद रहा। इससे इस केंद्र को 31 अक्तूबर 2019 को बंद करने के आदेश जारी किए गए हैं। केंद्र के बंद होने के साथ ही यहां कार्यरत सभी 14 कर्मचारियों की सेवाएं भी समाप्त हो गईं। राजकपूर सूरा ने कहा कि एक तो ग्रांट का नहीं मिलना तथा दूसरा केंद्र पर लगे अनियमितताओं के आरोपों के चलते इस केंद्र को बंद कर दिया गया है। केंद्र में जो अनियमितताएं हुईं, उसकी जांच चल रही है। जांच के बाद ही पता चलेगा कि इस नशा मुक्ति केंद्र में क्या-क्या अनियमितताएं हुईं।
वहीं दूसरी तरफ इस केंद्र में काम करने वाले कर्मचारियों ने अधिकारियों पर तानाशाही का आरोप लगाते हुए कहा कि यह केंद्र प्रशासन की भेंट चढ़ गया है। प्रशासनिक अधिकारियों ने इसमें कार्यरत कर्मचारियों का भविष्य अंधकारमय कर दिया।