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Jind News: दशहरे पर रावण तो जलेगा, शहर की 10 बुराइयों का अंत कब होगा

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19जेएनडी24: शहर के गोहाना रोड पर रात के समय सड़क किनारे बैठे बेसहारा गोवंश। संवाद
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जींद। दशहरे पर हर साल रावण, कुंभकर्ण और मेघनाद के पुतले जलते हैं। आतिशबाजी होती है, बुराई पर अच्छाई की जीत का संदेश गूंजता है और लोग नई उम्मीदों के साथ घर लौटते हैं। लेकिन जींद शहर की सड़कों पर पसरी गंदगी, गोहाना रोड पर रात के अंधेरे में बैठे बेसहारा गोवंश, ओवरफ्लो होते सीवरेज और नशे की गिरफ्त में फंसते युवाओं की तस्वीर कुछ और ही कहानी बयां करती है। यहां सवाल केवल रावण दहन का नहीं, बल्कि उन समस्याओं के अंत का है, जो हर साल लोगों की जिंदगी को मुश्किल बना रही हैं।
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जिले में नशे का बढ़ता प्रकोप, प्रदूषण, बंदरों और कुत्तों का आतंक, बेसहारा पशु, चिकित्सा सुविधाओं की कमी, अतिक्रमण, सीवरेज ओवरफ्लो, पार्किंग की समस्या और सफाई व्यवस्था का अभाव। यह 10 ऐसी चुनौतियां हैं, जिनसे शहरवासियों को अब तक स्थायी राहत नहीं मिल पाई है।
ऐसे में सवाल उठता है कि जब प्रतीकात्मक रूप से बुराई का अंत किया जा सकता है, तो शहर की इन समस्याओं पर निर्णायक कार्रवाई के लिए आखिर किस दिन का इंतजार है। दशहरे पर रावण दहन के साथ शहरवासियों की अपेक्षा है कि प्रशासन इन दस समस्याओं को भी प्राथमिकता से लेकर समाधान की ठोस शुरुआत करे। बुराई का प्रतीकात्मक पुतला तो हर साल जलता है, लेकिन जींद की समस्याओं का अंत तभी होगा, जब जिम्मेदार विभाग जमीन पर काम करते दिखाई देंगे।
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नशा युवाओं के भविष्य के लिए गंभीर चुनौती बन रहा है। इस पर केवल जागरूकता कार्यक्रम पर्याप्त नहीं हैं बल्कि नशे की सप्लाई पर रोक, नियमित निगरानी और नशे की गिरफ्त में आए युवाओं के पुनर्वास की व्यवस्था भी जरूरी है। -राजकुमार गोयल
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प्रदूषण शहरवासियों के लिए चिंता का विषय है। धूल, कचरे और वाहनों से होने वाले प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए ठोस कदम उठाने की जरूरत है। प्रदूषण के मामले में जिले की स्थिति को लेकर किए जाने वाले दावों की नियमित निगरानी और प्रमाणिक आंकड़ों के आधार पर कार्रवाई होनी चाहिए। -वीरेंद्र जांगड़ा, एडवोकेट
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बंदरों और आवारा कुत्तों के कारण लोगों, खासकर बच्चों और बुजुर्गों को परेशानी होती है। सड़कों पर घूमते बेसहारा पशु हादसों का खतरा बढ़ाते हैं। इनके प्रबंधन के लिए स्थायी योजना और जिम्मेदार विभागों की जवाबदेही तय होनी चाहिए। -महावीर कंप्यूटर
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चिकित्सा सुविधाओं में सुधार जरूरी है, ताकि मरीजों को उपचार के लिए दूसरे शहरों का रुख न करना पड़े। शहर में अतिक्रमण के कारण सड़कें संकरी हो रही हैं और यातायात प्रभावित होता है। पार्किंग की उचित व्यवस्था नहीं होने से बाजारों में जाम की स्थिति बनती है। -सुनील वशिष्ट
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सीवरेज ओवरफ्लो और सफाई की कमी से लोगों को रोजाना परेशानी झेलनी पड़ती है। जगह-जगह गंदगी और जमा पानी स्वच्छता व्यवस्था पर सवाल खड़े करते हैं। इन समस्याओं का समाधान केवल आश्वासन देने से नहीं, बल्कि नियमित निगरानी, तय समय सीमा और जवाबदेही से होगा। -डॉ. रजनीश जैन
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