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‘राम’ दिन में करते हैं पढ़ाई, ‘रावण’लगाते हैं फ्रूट की रेहड़ी

Sat, 17 Oct 2015 12:10 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला जींद
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अब रामलीला में पुराने कलाकारों की जगह किशोर व युवा कलाकारों की एंट्री होने लगी है। ये कलाकार दिन में पढ़ाई करते हैं और शाम को रामलीला के पात्र बनते हैं। कुछ कलाकार पिछले काफी समय से रामलीला से जुड़े हुए हैं।
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शहर के पुराने किले पर श्री सनातम धर्म आदर्श रामलीला द्वारा वर्ष 1955 से हर वर्ष रामलीला का आयोजन किया जाता है। दशरथ का किरदार निभाने वाले संजय चुघ पिछले 25 साल से रामलीला से जुड़े हैं। वहीं फ्रूट की रेहड़ी लगाने वाले विक्की परूथी रावण का किरदार निभाते हैं। किशोर व युवा कलाकारों में रामलीला के पात्र निभाने में काफी उत्साह रहता है।

दिन में फ्रूट की रेहड़ी लगाते हैं रावण
रावण का किरदार निभाने वाले विक्की परूथी ने बताया कि वह दिन में फ्रूट की रेहड़ी लगाते हैं और शाम को रिहर्सल के बाद अपना पात्र निभाते हैं। पिछले कई वर्षों से वह रावण का किरदार निभा रहे हैं।
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दिन में पढ़ाई, शाम को श्रीराम का पात्र
रामलीला में श्रीराम का पात्र का किरदार निभाने वाले 16 वर्षीय तुषार चोपड़ा ने बताया कि वह 12वीं कक्षा में पढ़ता है। दोपहर तक पढ़ाई करके रिहर्सल के लिए पहुंच जाते हैं। 25 अगस्त से तैयारियों में लगे हुए हैं।

स्कूल से आने के बाद करते हैं रिहर्सल
17 वर्षीय दीपक सहगल ने बताया कि वह रामलीला में लक्ष्मण का रोल निभा रहे हैं। स्कूल से आने के बाद दोपहर बाद रिहर्सल रूम में बाकी कलाकारों के साथ रिहर्सल करते हैं और उसके बाद अपना किरदार निभाते हैं। पिछले वर्ष ही रामलीला से जुड़ा हूं।

आईटीआई छात्र निभा रहा भरत का पात्र
भरत का पात्र निभा रहे जतिन शर्मा ने बताया कि वह आईटीआई प्रथम वर्ष का छात्र है। पढ़ाई के साथ-साथ वह पिछले दो वर्ष से रामलीला में किरदार निभा रहा है। रिहर्सल के लिए पढ़ाई के साथ अतिरिक्त से समय निकालना पड़ता है।

कलाकारों के संपर्क में आने पर लेने लगा रुचि
नौंवी कक्षा में पढ़ रहे 14 वर्षीय अभिषेक मिघलानी से ने बताया कि वह पिछले वर्ष से रामलीला में शत्रुघ्न का रोल निभा रहा है। वह यहां माता-पिता के साथ रामलीला देखने के लिए आता था। कलाकारों के संपर्क में आने के बाद उन्होंने रामलीला में रोल निभाने के लिए रुचि लेनी शुरू कर दी।

जरा सी गलती पर पड़ती थी फटकार
पिछले 25 वर्ष से दशरथ का रोल निभा रहे संजय चुघ ने बताया कि पहले की तुलना में अब समय बदल गया है। पहले रामलीला के आयोजन के लिए बाहर से डायरेक्टर आते थे। जरा सी गलती पर डांट पड़ती। अब ऐसा नहीं है। अब कलाकारों को सभी सुविधाएं आसानी से मिल जाती हैं।

20 हजार से साढ़े चार लाख में होता है आयोजन
श्री सनातम धर्म आदर्श रामलीला से वर्ष 1960 से जुड़े संत लाल चुघ ने बताया कि अब रामलीला के आयोजन में आर्थिक खर्च काफी बढ़ गया है। पहले जहां महज 20 हजार रुपये में काम चलता था, अब यह खर्च साढ़े चार लाख तक पहुंच गया है। दशहरे पर रावण दहन में एक लाख से ज्यादा का खर्च होता है।
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