सदर थाने में शनिवार देर रात को पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के वारंट ऑफिसर मनोज कश्यप ने तीन युवकों को अवैध तरीके से हिरासत रखने की शिकायत पर छापेमारी की। जांच के दौरान तीनों युवकों को थाने के लॉकअप में बंद पाया गया, जबकि ऑनलाइन रिकार्ड में उनकी गिरफ्तारी नहीं दिखाई गई थी। वारंट ऑफिसर द्वारा तीनों ही युवकों की गिरफ्तारी को कंप्यूटर में दर्ज नहीं करने की बात पर पुलिस ने सर्वर डाउन होने की बात कही है। इसके बाद वारंट ऑफिसर ने हिरासत में रखे तीनों युवकों का नागरिक अस्पताल में मेडिकल करवाया। जहां पर उनके शरीर पर चोट के निशान मिले। वारंट ऑफिसर ने थाना प्रभारी को 25 जुलाई को हाईकोर्ट में पेश होने के आदेश दिए। जानकारी के अनुसार गांव फरैण कलां निवासी महिपाल, नरेंद्र और नरेश पर दो मई को घर में घुसकर छेड़छाड़ करने, अपहरण करने और एससी एसटी एक्ट के तहत मामला दर्ज किया था। आरोपी महिपाल के भाई जयपाल ने बताया 13 जुलाई को पुलिस ने तीनों ही आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया, लेकिन पांच दिन बाद भी पुलिस ने आरोपियों को अदालत में पेश किया नहीं किया और अवैध तरीके से हिरासत में रखा है।
हाईकोर्ट से लगाई गुहार
जयपाल ने 16 जुलाई को हाईकोर्ट में याचिका दायर की बताया कि उसके भाई सहित तीन लोगों को सदर थाना पुलिस ने 13 जुलाई से हिरासत में रखा है। और अदालत में नहीं पेश कर रही है। शिकायत मिलने पर वारंट ऑफिसर मनोज कश्यप ने शनिवार देर शाम को सदर थाने में छापेमारी की। जांच के दौरान पकड़े गए आरोपी महिपाल, नरेंद्र व नरेश को थाने के लॉकअप में बंद पाया गया। अधिकारियों ने जब रिकार्ड खंगाला तो तीनों की गिरफ्तारी कार्ड में चढ़ी हुई मिली, लेकिन गिरफ्तारी कंप्यूटर में अधिकारिक रूप से दर्ज नहीं थी। जब इसके बारे में वारंट ऑफिसर ने जानकारी लेनी चाही थाना प्रभारी ने बताया कि सर्वर डाउन होने के कारण गिरफ्तारी कंप्यूटर में दर्ज नहीं की गई है। इसके बाद वारंट अधिकारी ने तीनों का नागरिक अस्पताल में मेडिकल करवाया। जहां पर चिकित्सकों ने लगभग दस घंटे पहले की चोट बताई। इस दौरान आरोपियों ने बताया कि 13 जुलाई को सरेंडर करने थाने पहुंचा था और पुलिस कर्मियों ने उसे थाने में रोक लिया और उसके साथ मारपीट की। मेडिकल करवाने के बाद प्रोटेक्शन अधिकारी ने तीनों को दोबारा से लॉकअप में छोड़ दिया। इस दौरान वारंट ऑफिसर ने थाना प्रभारी को 25 जुलाई को पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में जवाब दाखिल का करने निर्देश दिया है।
पंजाब एवं हाईकोर्ट के वारंट ऑफिसर रात को पहुंचे थे। जहां पर तीनों युवकों की गिरफ्तारी के बारे में जानकारी हासिल की। तीनों की गिरफ्तारी डाली गई थी। गिरफ्तार किए गए तीनों आरोपियों को रविवार को ड्यूटी मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश किया गया। जहां से तीनों को न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया है।
- सोमबीर ढाका, सदर थाना प्रभारी
तीनों की गिरफ्तारी डाली हुई थी, लेकिन सर्वर डाउन होने के कारण गिरफ्तारी को ऑन लाइन नहीं किया जा सकता था। युवकों के गिरफ्तारी कार्ड भरे हुए हैं ।
- वसीम अकरम, एएसपी नरवाना
इस मामले को लेकर पकड़े गए आरोपियों के परिजन रविवार को लघु सचिवालय में पहुंचे। जहां पर महिपाल के भाई जयपाल ने बताया कि युवकों पर पुलिस ने रंजिशन झूठा मुकदमा दर्ज किया था। दोनों पक्षों के बीच समझौता हो गया, लेकिन पुलिस ने नहीं माना। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस ने तीनों युवकों के साथ मारपीट की। रविवार को रोष स्वरूप गांव के कई लोग लघु सचिवालय पहुंचे और युवाओं के साथ मारपीट करने को लेकर पुलिस के खिलाफ नारेबाजी की।