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पशु चिकित्सक की हत्या से विद्यार्थियों और अध्यापकों में रोष

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तेलंगाना में पशु चिकित्सक की हत्या के आरोपियों को सजा दिलाने के लिए बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक का खून खौल रहा है। राजकीय पीजी कॉलेज में परिचर्चा के दौरान विद्यार्थियों ने कहा कि ऐसी घटनाओं के कारण महिलाओं का घरों से बाहर निकलना मुश्किल हो गया है। इन घटनाओं से निपटने के लिए समाज के हर वर्ग को आगे आना चाहिए। इसके बाद ही महिलाएं सुरक्षित रह सकेंगी। कड़े कानून बनने के बाद ही इस तरह की अमानवीय घटनाएं महिलाओं के साथ कम होगी। उन्होंने कहा कि आज अपराधियों पर लगाम लगाने के लिए सरकार कुछ काम नहीं कर रही है। आज कोई दिन ऐसा नहीं ढलता जिस दिन महिलाओं के साथ दुष्कर्म, चोरी और मारपीट की घटना नहीं घटती हो। इनसे निपटने के लिए सरकार को कड़े कानून बनाने चाहिए।
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समाज के लिए कलंक हैं ऐसे आरोपी
दुष्कर्म जैसी घटनाओं के आरोपी समाज के नाम पर कलंक हैं। ऐसे आरोपियों को समाज में रहने का कोई हक नहीं। दुष्कर्म के कारण महिला का जीवन खराब हो जाता है। उसकी सहन शक्ति खत्म हो जाती है और वह मानसिक रूप से परेशान रहती है। पशु चिकित्सक के मामले में सभी आरोपियों को शीघ्र ही फांसी की सजा देनी चाहिए ताकि समाज में इस तरह की हरकत करने की कोई भी व्यक्ति सोच नहीं सके। इन सभी आरोपियों को कड़ी सजा का प्रावधान किया जाना चाहिए।
शीला दहिया, प्राचार्य पीजी कॉलेज।
कल्पना करने से ही रोंगटे खड़े हो जाते हैं
आज समाज में कुछ ही भेड़ियों के कारण नारी जाति का घर से बाहर निकलना बंद हो गया है। तेलंगाना में जो घटना हुई है उसकी कल्पना करने भर से रोंगटे खड़े हो जाते हैं। आज नारी जाति पर लगातार घोर अत्याचार बढ़ रहा है। इसे रोकने के लिए कड़े कानून व्यवस्था की जरूरत है। समाज में इस तरह की घटना को वारदात देने वाले लोगों को फांसी से कम सजा का प्रावधान नहीं होना चाहिए।
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ममता।
खामियाजा भुगत रही बेटियां
देश में कानून व्यवस्था लचर होने का खामियाजा बेटियों को भुगतना पड़ रहा है। प्रत्येक दिन इस तरह की घटनाएं सामने आ रही हैं। दोषियों के हौसले लगातार बुलंद हो रहे हैं। इन तरह के दरिंदों को सरेआम फांसी की सजा देनी चाहिए। आज समाज में नौकरी पेशा करने वाली महिलाओं को घर से निकलना मुश्किल बना हुआ है। इसका कारण समाज में इस तरह के भेड़ियों का जमा होना है।
हितेशी।
आरोपियों के हौसले होते जा रहे हैं बुलंद
दुष्कर्म की घटनाओं को अंजाम देने आरोपियों को कई वर्षों तक सजा नहीं हो पाना अपराधियों के हौसले को बुलंद करता है। बेटियों पर होने वाले इस तरह के अत्याचार की जिम्मेदारी सरकार व प्रशासन की है। हर दिन घर से बेटियां बाहर जाती हैं। जब तक वह घर नहीं लौटती है अभिभावकों को चिंता लगी रहती है। आज ऐसा कोई दिन नहीं बीतता जिस दिन बेटियां इस तरह के दरिंदों की शिकार नहीं होतीं। सभी हत्यारों को सरेआम मौत के घाट उतारना चाहिए।
किरण।
समाज का हर वर्ग काफी आहत
पशु चिकित्सक के साथ हुई दुष्कर्म की घटना के कारण समाज का हर वर्ग आहत है। आरोपियों को कड़ी से कड़ी सजा मिलनी चाहिए। ऐसे घटनाओं से महिलाओं में भय का माहौल बना हुआ। ऐसे में सरकार को चाहिए कि वह ऐसे आरोपियों को फांसी जैसी कड़ी सजा सुनाएं, जिससे ऐसी घटनाओं पर रोक लगे।
सुषमा।
समाज में बदलाव जरूरी
दुष्कर्म जैसी घटनाओं के कारण ही माता-पिता अपनी बेटियों को घर से बाहर भेजने से कतराते हैं। बेटियां बेटों से हर क्षेत्र में आगे हैं। पहले की अपेक्षा अभिभावकों ने बेटियों को भी बेटों के समान शिक्षा व खेलकूद के अधिकार दिए हैं। बेटियां भी अपने क्षेत्र में कामयाब हो रही हैं, चाहे व शिक्षा का क्षेत्र हो या फिर खेल का। बेटियों ने अपनी अलग पहचान बनाई है। ऐसी घटनाओं से फिर से महिलाओं के सपनों पर रोक लगती है।
तजेंद्र कौर।
जल्द से जल्द मिले इंसाफ
महिलाओं की सुरक्षा को लेकर कड़े कानून बनने चाहिए। जिससे महिलाएं प्रताड़ित होने पर अपनी आवाज उठा सकें। हर साल लाखों महिलाओं के साथ दुष्कर्म जैसी घटनाएं होती हैं। पता नहीं कितने केस अभी पेंडिंग पड़े हैं। ऐसा कानून बनाना चाहिए कि आरोपी को जल्द से जल्द सजा मिले और पीड़ित महिला को न्याय। तभी ऐसी घटनाओं को रोका जा सकेगा।
सौम्या ।
डर के माहौल में जी रही
दुष्कर्म की घटनाओं पर समाज में रोष फैलता है। महिलाएं हर समय डर के माहौल में अपना जीवन जीती हैं। कहने को तो महिलाओं की सुरक्षा के लिए कानून बने हुए हैं, लेकिन महिलाओं को समय पर न्याय नहीं मिल पाता। ऐसी कई घटनाएं पहले भी हो चुकी हैं, जिस पर समाज के लोगों ने कैं डल मार्च निकालकर रोष प्रकट किया। ऐसे दरिंदों के लिए तो फांसी की सजा का प्रावधान होना चाहिए।
रितु ।
महिलाओं को भी मिलनी चाहिए आजादी
कहने को तो महिलाओं को आजादी है, लेकिन आज भी कुछ चीजों पर महिलाओं के लिए प्रतिबंध लगाया जाता है। ऐेसे में महिलाओं को भी पुरुषों के समान सभी अधिकार मिलने चाहिए। दुष्कर्म की घटनाओं के कारण महिलाओं को घर से बाहर जाने पर प्रतिबंधित किया जाने लगा है। महिलाएं पहले भी प्रताड़ित होती थी और आज भी प्रताड़ित हो रही हैं।
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पिंकी।
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