जींद। विश्व महिला दिवस के उपलक्ष में जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग की तरफ से शुक्रवार को कार्यक्रम का आयोजन खंड विकास और पंचायत विभाग के हॉल में किया गया। इस समारोह में पेयजल संरक्षण और जल जीवन मिशन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाली जिला भर की 35 महिलाओं को प्रशंसा पत्र और स्मृति चिह्न देकर सम्मानित किया गया।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग के अधीक्षक अभियंता विक्रम सिंह मोर उपस्थित रहे जबकि कार्यकारी अभियंता भानू प्रकाश शर्मा ने अति विशिष्ट अतिथि के तौर पर शिरकत की। मुख्य अतिथि विक्रम सिंह मोर ने कहा कि महिलाओं का समाज के निर्माण में अतुलनीय योगदान है।
उन्होंने महिला दिवस के इतिहास पर प्रकाश डालते हुए बताया कि इसकी शुरुआत उत्तरी अमेरिका व यूरोप में महिला श्रमिकों के आंदोलनों से हुई थी। पहला महिला दिवस 1911 में मनाया गया था जबकि 1917 में रूस की महिलाओं ने अपने अधिकारों के लिए जो हड़ताल शुरू की, उसी के परिणामस्वरूप उन्हें वोट का अधिकार प्राप्त हुआ।
उन्होंने कहा कि आठ मार्च का दिन महिलाओं के संघर्ष, उनकी चुनौतियों और उनकी सफलता को याद करने का है। विशिष्ट अतिथि कार्यकारी अभियंता भानू प्रकाश शर्मा ने कहा कि जल जीवन मिशन की सफलता में महिलाओं की भूमिका रीढ़ की हड्डी के समान रही है। ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में स्वयं सहायता समूह की महिलाओं ने पेयजल की जांच और आपूर्ति प्रबंधन में बढ़-चढ़कर भाग लिया है।
जिला सलाहकार रणधीर मताना ने बताया कि अब प्रत्येक गांव की ग्राम जल और सीवर समिति में स्वयं सहायता समूह की महिलाओं को अनिवार्य रूप से शामिल किया जा रहा है ताकि वे पंचायतों के साथ मिलकर जल प्रबंधन में सुधार कर सकें। कार्यक्रम के दौरान सीडीपीओ कांता यादव, सुलोचना, संतोष यादव और सुमन सहित आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं, स्वयं सहायता समूह की महिलाओं, महिला पंचों व सरपंचों ने पेयजल संरक्षण के क्षेत्र में किए गए अपने कार्यों की प्रेरक कहानियां साझा कीं।
इस अवसर पर उपमंडल अभियंता रणवीर सिंह, राकेश शर्मा, खंड समन्वयक दिनेश मलिक, सुरेंद्र दुग्गल, ईश्वर सिंह, बलवान सिंह, सोमलता सैनी, कुशल शर्मा और सुरेंद्र नरवाल सहित भारी संख्या में महिलाएं उपस्थित रहीं। वक्ताओं ने एक स्वर में कहा कि जल महोत्सव और जल प्रबंधन में महिलाओं की भागीदारी ही भविष्य की जल सुरक्षा सुनिश्चित करेगी।