जींद। हरियाणा राज्य सूचना आयोग ने आरटीआई के तहत जानकारी उपलब्ध न कराने पर पुलिस अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर कड़ी नाराजगी जताई है। मुख्य सूचना आयुक्त टीवीएसएन प्रसाद ने कहा कि पुलिस अधिकारियों को आरटीआई नियमों की जानकारी और उसके अनुपालन के लिए विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा।
उन्होंने कहा कि यदि किसी जानकारी का रिकॉर्ड पुलिस के पास उपलब्ध है तो उसे 30 दिन की समयसीमा का इंतजार किए बिना तुरंत उपलब्ध कराया जाना चाहिए। यह टिप्पणी एक वर्चुअल सुनवाई के दौरान की गई, जिसमें कैथल की एसपी उपासना, डीएसपी हेडक्वार्टर और जींद के अधिवक्ता घनश्याम गोयल भी शामिल थे।
वर्ष 2020 में कोरोना काल में धारा 144 लागू थी। 29 मार्च को कैथल के टटियाना रोड पर भीड़ एकत्र होने पर पुलिस ने कार्रवाई की थी। गश्त के दौरान पुलिस ने कुछ लोगों को हिरासत में लिया, जिनमें विपिन, कुलदीप, बलराज, संजीव और मलकीत शामिल थे। पुलिस ने इन पर डीसी के आदेशों के उल्लंघन की एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की थी।
बाद में आरोपी विपिन के अदालत में अनुपस्थित रहने पर जेएमआईसी ईशा गर्ग ने 31 जुलाई 2023 को उसके खिलाफ धारा 174ए के तहत एफआईआर दर्ज करने के आदेश दिए। मामले में अधिवक्ता घनश्याम गोयल ने आरटीआई के तहत डीएसपी कार्यालय से कार्रवाई की जानकारी मांगी लेकिन इसे व्यक्तिगत सूचना बताते हुए देने से इन्कार कर दिया गया। बाद में एसपी कार्यालय ने भी जानकारी साझा नहीं की।
आयोग ने पुलिस की इस कार्यप्रणाली पर नाराजगी जताई और स्पष्ट किया कि आरटीआई के तहत उपलब्ध जानकारी को छिपाना उचित नहीं है। इसके साथ ही संबंधित अधिकारियों को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया गया।
वर्जन
सुनवाई के दौरान मुख्य सूचना आयुक्त टीवीएसएन प्रसाद ने निर्देश जारी किए हैं कि हरियाणा में पुलिस को सूचना का अधिकार देने को लेकर ट्रेनिंग दी जाएगी। यदि पुलिस के पास आरटीए के तहत मांगी गई जानकारी उपलब्ध है तो 30 दिनों की बजाए तुरंत मुहैया करवाएं।
-अधिवक्ता घनश्याम गोयल