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कृषि विधेयक को लेकर कहीं पर दिया धरना, कही पर समर्थन में निकाली ट्रैक्टर यात्रा

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कृषि विधेयक के खिलाफ नई अनाज मंडी में धरना देते आढ़ती। - फोटो : Jind
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केंद्र सरकार द्वारा कृषि क्षेत्र के लिए लाए गए विधेयकों का किसान और आढ़ती संगठन विरोध कर रहे हैं। इसी कड़ी में अब 25 सितंबर को भारत बंद का एलान किया है। भारतीय किसान यूनियन सहित विभिन्न संगठनों ने इसकी तैयारी शुरू कर दी है तो वहीं मंगलवार को भाजपा नेताओं की अगुवाई में किसानों ने ट्रैक्टर मार्च निकाल कर विधेयक का समर्थन किया। दूसरी ओर पांच दिन से चल रहा आढ़तियों का धरना समाप्त हो गया है। आढ़ती अब धरना नहीं देंगे, लेकिन हड़ताल को जारी रखेंगे।
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मंगलवार को नई अनाज मंडी में धरने पर बैठेे आढ़तियों ने कहा कि सरकार जब तक किसानों की मांगों के अनुरूप लिखित आदेश जारी नहीं करती तब तक आंदोलन जारी रहेगा। आढ़ती वेलफेयर एसोसिएशन के प्रधान सत्तू रेढू और द न्यू फूडग्रेन डीलर्स वेलफेयर एसोसिएशन के प्रधान सुशील सिहाग ने कहा कि मुख्यमंत्री मनोहर लाल से हुई बातचीत में कई मांगों पर सहमति बनी है। इसमें चार प्रतिशत मार्केट फीस को घटाकर एक प्रतिशत कर दिया गया है। इस पर अधिकतर आढ़तियों ने कहा कि जब तक सरकार इस घोषणा के अनुरूप लिखित आदेश जारी नहीं करती तब तक घोषणा कोई मायने नहीं रखती। आढ़ती वेल्फेयर एसोसिएशन के संरक्षक सेवानिवृत्त सूबेदार कर्ण सिंह मोर ने कहा कि इससे फसल खरीदारों को फायदा होगा, न कि आढ़तियों को।
इस मौके पर जगदीप मान, भीमसेन मित्तल, सतपाल सिंधु, प्रेम गोयल, धीरज जैन, जुगतीराम श्योराण, अजीत ढांडा ने भी संबोधित किया। धरने में मुख्य तौर पर राजेंद्र ढूल, तरसेम गोयल, मनीष यादव, मनोज शर्मा, राजेश गोस्वामी, रामकेश रेढू, सुरेश शर्मा, प्रदीप गर्ग, दिलबाग गोयत, रमेश कुमार, रमन गोयल, मनोज यादव, रामेहर शर्मा और रोशन शर्मा मौजूद रहे।
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भारत बंद में शामिल हों हर वर्ग के लोग
अखिल भारतीय किसान सभा व सीटू ने 25 सितंबर को विधेयकों के विरोध में भारत बंद में लोगों को शामिल करने के लिए अभियान चलाया है। इस दौरान सीटू नेता सुरेश करसोला ने कहा कि देश में आवश्यक वस्तु अधिनियम में प्रस्तावित संशोधन व कृषि संबंधी दो अन्य विधेयक किसान-मजदूर विरोधी हैं। प्रस्तावित संशोधन देश की खाद्य सुरक्षा के लिए जरूरी कृषि उत्पादों के मूल्य निर्धारण और उपलब्धता पर सभी प्रतिबंधों के नियमों को हटा देते हैं। इससे बिचौलिए और व्यापारियों द्वारा सट्टेबाजी के कारण कृत्रिम पैदा करने का रास्ता साफ करते हैं। जो देश की खाद्य सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा है। ऐसे में 25 सितंबर को किसान संगठनों के आह्वान पर होने वाले भारत बंद में हर वर्ग सहयोग दे।
पूरी तरह से किसान हितैषी हैं विधेयक
दूसरी ओर विधेयकों के समर्थन में किसानों ने भाजपा नेताओं की अगुवाई में समर्थन यात्रा निकाली। किसान रानी तालाब स्थित नेहरू पार्क में एकत्रित हुए और यहां से ट्रैक्टर यात्रा शुरू कर गोहाना रोड स्थित शहीदी स्मारक तक गए। यहां पर शहीदों को श्रद्धांजलि देते हुए विधेयकों को किसानों की आजादी बताया। हालांकि इस कार्यक्रम में भाजपा नेता पर्दे के पीछे ही रहे, लेकिन भाजपा के कुछ जिला स्तरीय पदाधिकारी खुद ट्रैक्टर चलाते पहुंचे।
किसान राजेंद्र, भरत सिंह, सुरेश कुमार, पूर्ण चंद, जागीराम, रामदिया व स्वरूप सिंह ने बताया कि यह विधेयक किसानों को अपना उत्पाद देशभर में कहीं भी बेचने का अवसर देते हैं। वह किसानों की आर्थिक आजादी के लिए उठाया गया सही कदम है। अब अनुबंध खेती के लिए मजबूत कानून बनाकर देश के किसानों को सुरक्षा मुहैया करवाई गई है। नए कानून लागू होने के बाद अनुबंध करने वाला व्यवसायी अपनी शर्तों से भाग नहीं सकेगा। आवश्यक वस्तु अधिनियम में किसान हित में संतुलित छूट प्रदान की है। उप मंडल अधिकारी के माध्यम से विवाद निपटान का निर्णय उचित है। क्योंकि इस तरह के केसों के निपटान में सिविल कोर्ट में लंबा समय लग जाता है।
एमएसपी ऊंट के मुंह में जीरा : माजरा खाप
किसानों के आंदोलन के बीच माजरा खाप ने भी केंद्र सरकार द्वारा बढ़ाए गए न्यूनतम समर्थन मूल्य को नाकाफी बताया है। माजरा खाप के प्रेस प्रवक्ता समुंद्र फोर ने बताया कि गेहूं का एमएसपी 50 रुपये प्रति क्विंटल यानी पांच पैसे प्रति किलोग्राम बढ़ाया गया है। वहीं खाद की कीमत दो रुपये प्रति किलोग्राम बढ़ी है। दवाइयों की कीमत दो गुना तक बढ़ी है। सरकार ढिंढोरा पीट रही है 2022 में फसल की कीमत दोगुना होगी, ऐसे में समझ में नहीं आता है कि कैसे जब रेट बढ़ाने की रफ्तार रुपयों में नहीं होकर प्रति किलो पैसों में हो तो दोगुना होगी।

कृषि विधेयक के समर्थन में ट्रैक्टर यात्रा निकालते किसान।- फोटो : Jind

कृषि विधेयक के समर्थन में निकाली गई ट्रैक्टर रैली में शामिल किसान।- फोटो : Jind

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