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बैंकों को मर्ज करने के विरोध में सार्वजनिक बैंकों में रही हड़ताल

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मांगों को लेकर नारेबाजी करते बैंक कर्मचारी और अधिकारी। - फोटो : bureau
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एसबीआई के एसोशिएट बैंकों के वियल के विरोध और अन्य मांगों के लिए सार्वजनिक क्षेत्र के 140 बैंकों के हजारों कर्मचारियों और अधिकारियों ने एक दिन की हड़ताल रखी। इससे बैंक में काम से आए उपभोक्ताओं को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा। वहीं बैंक कर्मचारियों ने सफीदों गेट स्थित एसबीओपी की मुख्य शाखा के बाहर बैंक यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियन के बैनर तले कर्मचारियों ने नारेबाजी करते हुए सरकार से विलय की नीति वापस लेने की मांग की। कर्मचारियों ने आरोप लगाया कि सरकार पहले पांच बैंकों का विलय करने के बाद सार्वजनिक क्षेत्र के कुल 27 बैंकों के छह बैंक बनाना चाहती है। इसको किसी भी सूरत में लागू नहीं होने दिया जाएगा। यहां आल इंडिया बैंक ऑफिसर एसोसिएशन के जिला प्रधान सतबीर सिंह सरोहा ने कहा कि अन्य मुद्दों के साथ-साथ कर्मचारी व अधिकारी बैंकों में निजीकरण का भी विरोध कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि 1991 से सरकार 27 बैंकों को सात बैंकों में मर्ज करने की योजना लागू करने का प्रयास कर रही है, लेकिन विरोध के चलते ऐसा नहीं हो पा रहा है। बैंक कर्मचारी विरोधी नीतियां लागू कर रहे हैं। इसमें कर्मचारी की मौत पर उसके परिवार को मिलने वाली सहायता पर अनाप-शनाप शर्तें लगाई जा रही हैं। इसका कर्मचारी विरोध करते हैं। इस मौके पर टीपी सिंह, अवतार सैनी, विनोद कुमार, रघुबीर सिंह व मनोज मौजूद रहे।
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बड़े बकायेदारों से पैसे वसूले सरकार
बैंक अधिकारियों ने कहा कि बैंकों को छोटे देनदारों से नहीं, बड़े कर्ज लेने वालों से खतरा है। ऐसे में जिन लोगों ने हजारों करोड़ रुपये के लोन लिए हैं, उनसे पैसे की वसूली सरकार को करनी चाहिए, ताकि बैंकों की माली हालत ठीक रहे।
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