संवाद न्यूज एजेंसी
जींद। नागरिक अस्पताल में पहले से ही चिकित्सकों की कमी चल रही थी। अब तीन चिकित्सकों ने नौकरी छोड़ दी जबकि एक का स्थानांतरण हो गया जिससे चिकित्सा सेवा प्रभावित हो रही है। अस्पताल की ओपीडी में सामान्यतया 12 मरीज आते हैं लेकिन सोमवार और मंगलवार को इनकी संख्या 1800 तक पहुंच जाती है। चिकित्सकों की कमी के चलते जांच कराने के लिए मरीजों को घंटों डाॅक्टर का इंतजार करना पड़ता है।
नागरिक अस्पताल में ओपीडी का समय दो बजे तक है। इसलिए मरीजों को ओपीडी के बाद टेस्ट भी करवाने पड़ते हैं, जोकि समय नहीं रहने के कारण अगले दिन होते हैं। नागरिक अस्पताल में 200 बेड की व्यवस्था हुए छह साल हो गए हैं। 200 बेड का अस्पताल होने के बाद यहां 55 चिकित्सकों के पद स्वीकृत किए गए थे लेकिन आज तक यहां चिकित्सकों की संख्या 40 तक नहीं पहुंच पाई है। अप्रैल-मई में काफी चिकित्सकों की नियुक्तियां हुई थींं। जींद को भी 32 चिकित्सक मिले थे लेकिन इनमें से 12 ने ही ज्वाइन किया था। इनमें से तीन-चार चिकित्सक तो उसी समय छोड़ गए जबकि दो-तीन एमडी करने के लिए चले गए। अब हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉ. प्रदीप, ईएनटी डॉ. सोनिया और एनेस्थीसिया के डॉक्टर . विशाल ने नौकरी छोड़ दी है। जबकि एमओ डॉ. पारुल ने यहां से अपना स्थानांतरण करवा लिया। अब फिर से अस्पताल में चिकित्सकों की संख्या 31 रह गई है। नए सात चिकित्सक सिर्फ इमरजेंसी में काम करते हैं। चिकित्सकों की घटती संख्या के कारण मरीजों को ओपीडी के लिए काफी लंबा इंतजार करना पड़ता है।
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एक फिजिशियन और एक ही सर्जन
नागरिक अस्पताल में इस समय एक फिजिशियन डॉ. वनीता हैं। एकमात्र सर्जन डॉ. चंद्रमोहन हैं। डॉ. चंद्रमोहन एक सप्ताह में तीन दिन ऑपरेशन थिएटर में रहते हैं, इसलिए तीन दिन मरीजाें को ओपीडी में उनका ऑपरेशन थिएटर से बाहर आने का इंतजार करना पड़ता है। वहीं एकमात्र फिजिशियन डॉ. वनीता पर भी काम पर दबाव ज्यादा रहता है। दोनों ही चिकित्सक जिस दिन छुट्टी पर होते हैं, उस दिन मरीजों को वापस लौटना पड़ता है।
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कैसे शुरू होगा आईसीयू
नागरिक अस्पताल में आईसीयू शुरू करने के लिए पिछले दो साल से प्रयास किए जा रहे हैं। आईसीयू के लिए कम से कम चार एनेस्थीसिया चिकित्सकों की जरूरत है। डॉ. गोपाल गोयल सिविल सर्जन बन गए है। डॉ. विशाल ने नौकरी छोड़ दी है जबकि एक अन्य चिकित्सक पहले ही नौकरी छोड़ चुके हैं। अब अस्पताल में केवल एक ही एनेस्थीसिया चिकित्सक बचे हैं। ऐसे में आईसीयू शुरू करने के लिए तीन और एनेस्थीसिया चिकित्सकों की जरूरत होगी। वहीं आईसीयू के लिए अलग से 20 स्टाफ नर्स की जरूरत भी होगी, जोकि स्वास्थ्य विभाग के पास नहीं हैं। स्वास्थ्य विभाग के पास 151 स्टाफ नर्स में से 99 ही कार्यरत हैं। इनकी वार्डों तथा इमरजेंसी में ड्यूटी रहती हैं।
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नागरिक अस्पताल में चिकित्सकों की काफी कमी है। इसके बाद भी मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं दी जा रही हैं। जल्द आईसीयू शुरू करने के लिए चिकित्सकों व पैरामेडिकल स्टाफ की मांग की गई है। कुछ अन्य स्पेशलिस्ट चिकित्सकों की मांग भी मुख्यालय को भेजी गई है।-डॉ. गोपाल गोयल, सिविल सर्जन।