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11 दिसंबर तक स्कूल नहीं खुले तो आंदोलन करेंगे निजी स्कूल संचालक

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पत्रकारों से बातचीत करते निजी स्कूल संचालक। संवाद - फोटो : Jind
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स्कूल खोलने की मांग को लेक प्राइवेट स्कूल संघ के बैनर तले प्राइवेट स्कूल संचालकों की बैठक हुई। इसमें स्कूल संचालकों ने सरकार के खिलाफ हुंकार भरी और जल्द से जल्द स्कूल खोलने की मांग की। प्राइवेट स्कूल संचालकों ने चेतावनी दी है कि अगर 11 दिसंबर से स्कूल ने अनुमति नहीं दी तो मजबूरन प्राइवेट स्कूल संचालकों को राज्य स्तर पर धरने शुरू कर आंदोलन की राह पकड़नी पड़ेगी।
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पत्रकारवार्ता के दौरान प्राइवेट स्कूल संघ के जिला प्रधान सतपाल जागलान ने कहा कि प्राइवेट स्कूलों में कोई कोरोना संक्रमित नहीं मिला। प्राइवेट स्कूलों के प्रति सरकार की कोई और मंशा जाहिर हो रही है। उन्होंने कहा कि कोरोना महामारी के दौरान सरकार सरकारी स्कूल के बच्चों को लैपटॉप की सुविधा दे रही है, जबकि प्राइवेट स्कूलों के बच्चों की ओर कोई ध्यान नहीं दे रही।
ब्लॉक प्रधान सतीश, विरेंद्र सिंह, प्रदीप नैन, विरेंद्र कुंडू , रानी, प्रवीण कुमार, रमेश वत्स व दीपक सिंगला ने कहा कि कोरोना महामारी के कारण कई महीनों से स्कूल बंद होने के कारण प्राइवेट स्कूल संचालक परेशान हैं। उन्होंने कहा कि नौवीं से बारहवीं कक्षा तक स्कूल खुलने के कारण स्कूल दोबारा पटरी पर आने की आस जगी थी, लेकिन कोरोना की आड़ लेकर फिर दोबारा स्कूल बंद करना प्राइवेट स्कूलों के भविष्य के लिए ठीक नही है। प्राइवेट स्कूल आर्थिक समस्या से जूझ रहे हैं। स्कूल बंद होने के कारण शिक्षकों के वेतन की अदायगी नहीं हो रही। सरकारी स्कूल के अध्यापकों को हर माह वेतन दिया जा रहा है, लेकिन प्राइवेट स्कूलों के पास आर्थिक समस्या है और बसों के टैक्स व अन्य खर्चों के कारण परेशानी हो रही है। इन समस्याओं का समाधान सिर्फ सरकार ही कर सकती है। जब सरकारी स्कूल बंद होने के बाद सरकार वेतन दे रही है तो प्राइवेट स्कूलों के अध्यापकों को भी सरकार अपने कोष से वेतन दें, ताकि उनका जीवन यापन हो सके। उन्होंने कहा कि प्रदेश में रोडवेज बसें खचाखच भर कर चल रही हैं। बरोदा उपचुनाव के दौरान सत्ता व विपक्ष सभी ने जमकर रैलियां की और जब स्कूल खोलने क ी बात आती है तो कोरोना की आड़ ली जा रही है। उन्होंने कहा क िजिस प्रकार बच्चे को मां से दूर नहीं रखा जा सकता, उसी प्रकार बच्चों को शिक्षा से दूर नहीं रखा जा सकता। बसों पर टैक्स व पासिंग पर प्रतिदिन 50 रुपये जुर्माना लेना गलत है। जब स्कूल बंद हैं तो टैक्स भी नहीं लेना चाहिए। एक ओर सरकार स्वरोजगार का नारा देती है और दूसरी ओर लाखों शिक्षकों को बेरोजगार बना दिया। सभी स्कूल संचालकों ने सरकार से मांग की है कि स्कूलों को खोला जाए।
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