फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

अवैध रूप से नाबालिग का गर्भपात करने के आरोप में निजी अस्पताल सील

विज्ञापन
जांच के दौरान अस्पताल के बाहर तैनात पुलिस। - फोटो : Jind
विज्ञापन
गोहाना रोड पर नए बाईपास के पास छह माह की नाबालिग गर्भवती किशोरी का अवैध रूप से गर्भपात करने के आरोप में स्वास्थ्य विभाग की टीम ने नवजीवन अस्पताल को सील कर दिया। अस्पताल में लाइट नहीं होने के कारण सही प्रकार से जांच नहीं हो सकी है। अब स्वास्थ्य विभाग की टीम मंगलवार या बुधवार को दोबारा से ड्रग इंस्पेक्टर की मौजूदगी यहां सर्च अभियान चलाएगी। फिलहाल टीम को कुछ संदिग्ध दवाइयां व अन्य सामान मिला है। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार अस्पताल को नरेश भारद्वाज चला रहा था। नरेश भारद्वाज के पास कोई डिग्री नहीं है। ऐसे में फिलहाल अस्पताल को सील कर दिया है।
विज्ञापन

पीएनडीटी के नोडल अधिकारी डॉ. प्रभूदयाल के अनुसार स्वास्थ्य विभाग को कुछ दिन पहले सूचना मिली थी कि नवजीवन अस्पताल में अवैध रूप से गर्भपात किया गया है। इस पर स्वास्थ्य विभाग की टीम ने यहां छापेमारी की तो अस्पताल से गर्भपात में प्रयोग होने वाली दवाएं भी मिली हैं।
स्वास्थ्य विभाग एक सप्ताह तक देता रहा दबिश
स्वास्थ्य विभाग के सूत्रों के अनुसार 21 अक्तूबर को भी अस्पताल में छापेमारी की थी लेकिन उस समय स्वास्थ्य विभाग की टीम अस्पताल में कुछ भी संदिग्ध नहीं ढूंढ पाई। इसके बावजूद अस्पताल पर नजर रखी गई।
विज्ञापन

पीड़िता के सहारे खुला मामला
स्वास्थ्य विभाग के सूत्रों के अनुसार करीब पांच-छह महीने एक नाबालिग किशोरी के साथ दुष्कर्म हुआ था। इसके बाद से ही परिजन लोकलाज के डर से गर्भपात करवाने की फिराक में थे। इसी दौरान उनका संपर्क नवजीवन अस्पताल से हुआ और 14 हजार रुपये में गर्भपात करवाया गया। पिछले एक सप्ताह से स्वास्थ्य विभाग की टीम लगातार मामले को खंगाल रही थी लेकिन कोई सुराग नहीं मिला। इस पर पुलिस में दर्ज एफआईआर के आधार पर पीड़िता तक पहुंचा गया और पता चला कि नवजीवन अस्पताल में ही अवैध रूप से गर्भपात हुआ है।
21 अक्तूबर को भी जांच की गई थी लेकिन तब मामला साफ नहीं हो पाया। ऐसे में अब स्वास्थ्य विभाग ने अपने स्तर पर मामले का पता लगाया है। जांच में सामने आया है कि अस्पताल चलाने वाला दसवीं या 12वीं पास नरेश भारद्वाज नामक युवक है। फिलहाल आरोपी फरार है। अस्पताल को सील कर दिया है। एक-दो दिन में ड्रग इंस्पेक्टर की मौजूदगी में फिर से जांच की जाएगी। -डॉ. प्रभूदयाल, नोडल अधिकारी, पीएनडीटी।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें