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कोर्ट के आदेश के तीन दिन बाद बंदी का हुआ मेडिकल

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बंदी नवीन का नागरिक अस्पताल में मेडिकल करवाते पुलिस कर्मी। - फोटो : bureau
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 दुराचार के आरोपी के साथ जेल में मारपीट होने पर जेल प्रशासन ने पिटाई के पांच दिन बाद मेडिकल करवाया गया है। जबकि अदालत द्वारा भी बंदी के मेडिकल करवाने के तीन दिन पहले ही आदेश कर दिए थे। बंदी के परिजनों ने जेल प्रशासन पर मामले में लापरवाही बतरने के आरोप लगाए हैं। सोमवार को पुलिस बंदी को नागरिक अस्पताल में लेकर आई। जहां पर मेडिकल के दौरान जांघ के अलावा सीने के निचले हिस्से, गर्दन और दाई आंख पर भी चोट के निशान साफ दिखाई दे रहे थे। भारत नगर निवासी नवीन किशोरी के साथ दुराचार करने के मामले में जेल में बंदी है। आरोप है कि 28 जुलाई को जेल वार्डन जोगेंद्र सिंह किशोरी के पिता को आरओ का मिस्त्री बताकर जेल के अंदर ले गया। यहां जेल वार्डन ने बंदी नवीन को अपने पास बुला लिया और जेल वार्डन की मौजूदगी में ही किशोरी के पिता ने आरोपी की धुनाई कर दी। बाद में जेल के दूसरे सुरक्षा कर्मियों ने उसे छुड़वाया। जेल के अंदर ही पीड़िता के पिता द्वारा पिटाई का मामला सामने आते ही हड़कंप मच गया। बाद में 29 जुलाई को बंदी नवीन से मिलने के लिए उसके चाचा रणबीर और ताऊ राजेंद्र मुलाकात करने गए तो मामले का खुलासा हुआ। जहां पर नवीन ने बताया कि उसके साथ जेल में मार पिटाई की है और जान से मारने की धमकी दी है। इसके बाद परिजनों ने इसके लिए अदालत में याचिका दायर करके मेडिकल करवाने की गुहार लगाई। बंदी नवीन के ताऊ राजेंद्र ने बताया कि उसके भतीजे नवीन के साथ जेल में मारपीट की गई है। अदालत के आदेशों के तीन दिन व मार पिटाई के पांच दिन बीत जाने के बाद सोमवार को मेडिकल करवाया गया है। चोट के निशान अब भी साफ दिखाई दे रहे हैं। जेल के अंदर ले जाने वाले वार्डन को तो जेल प्रशासन ने निलंबित कर दिया, लेकिन गैर कानूनी तरीके से जेल के अंदर जाकर उसके भतीजे के साथ मारपीट करने वाले व्यक्तियों के खिलाफ अभी तक कोई कार्रवाई नहीं की है। इसलिए जेल वार्डन और पिटाई करने वाले व्यक्ति के खिलाफ भी मामला दर्ज किया जाए।
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अदालत के आदेश मिलते ही बंदी का मेडिकल करवा दिया गया है। ड्यूटी में लापरवाही बरतने पर जेल वार्डन जोगेंद्र को पहले ही निलंबित कर दिया गया है और उसकी विभागीय जांच की जा रही है। विभागीय जांच के बाद आगामी कार्रवाई की जाएगी। इसके लिए जल्द ही जेल प्रशासन मामला दर्ज करवाएगा।
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- डॉ. हरीश रंगा, जेल अधीक्षक

 
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