जिले में शिक्षा की गुणवत्ता के सुधार के लिए क्लास रेडिनेस कार्यक्रम के तहत जिला समन्वयक एफएलएन राजेश वशिष्ठ ने प्राथमिक विद्यालयों का निरीक्षण किया। यह कार्यक्रम बालवाटिका-तीन से लेकर पांचवीं कक्षा तक के विद्यार्थियों के लिए संचालित किया जा रहा है।
कार्यक्रम में खेल-खेल में शिक्षा देने की पद्धति अपनाई गई है। जिले के 423 प्राथमिक विद्यालयों में यह कार्यक्रम चल रहा है। इसमें लगभग 30922 बच्चे भाग ले रहे हैं। विभागीय समय-सारिणी के अनुसार प्रतिदिन बच्चों को विभिन्न गतिविधियों के माध्यम से नई-नई चीजें सिखाई जा रही हैं।
इन गतिविधियों में खेल, चित्रकला, कहानी सुनाना, समूह चर्चा, चार्ट और मॉडल निर्माण जैसी रचनात्मक विधियां शामिल हैं। जिला समन्वयक राजेश वशिष्ठ ने बताया कि शिक्षक अब बच्चों को स्वयं करके सीखने की पद्धति से शिक्षित कर रहे हैं। इस पद्धति से बच्चों में रटने की प्रवृत्ति समाप्त हो रही है और उनमें जिज्ञासु प्रवृत्ति विकसित हो रही है।
बच्चे अब विषयों को समझकर सीख रहे हैं। इससे उनका आत्मविश्वास बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि यह कार्यक्रम बच्चों में रचनात्मकता, सहयोग और संवाद कौशल को भी प्रोत्साहित कर रहा है। अवलोकन के दौरान यह देखा गया कि बच्चे चार्ट, मॉडल और अन्य शैक्षणिक सामग्रियों के माध्यम से अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर रहे हैं।
शिक्षक बच्चों को प्रोत्साहित कर रहे हैं कि वह अपनी कल्पनाशक्ति का उपयोग करें और सीखने को आनंददायक बनाएं। विशेष अवसरों और दिवसों पर बच्चे सामाजिक संदेश देने वाली गतिविधियों में भी भाग ले रहे हैं, जैसे पर्यावरण संरक्षण, स्वच्छता, जल बचाओ और राष्ट्रीय पर्वों से जुड़ी प्रस्तुतियां। इन गतिविधियों से बच्चों में सामाजिक जागरूकता और जिम्मेदारी की भावना विकसित हो रही है।
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क्लास रेडिनेस प्रोग्राम से विद्यालयों का वातावरण सकारात्मक हुआ है। बच्चे अब विद्यालय आने के लिए उत्साहित रहते हैं। यह पहल प्राथमिक शिक्षा को अधिक प्रभावी, व्यवहारिक और आनंददायक बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो रही है।
-राजेश वशिष्ट, जिला समन्वयक एफएलएन