जींद। राजकीय महाविद्यालय में विद्यार्थियों को साइबर अपराध से बचाव के बारे में जागरूक किया गया। अमर उजाला फाउंडेशन की ओर से आयोजित पुलिस की पाठशाला में विशेष तौर पर डीएसपी जोगेंद्र सिंह पहुंचे।
उन्होंने कहा कि जागरूकता से ही साइबर अपराध से बचाव संभव है। कुछ समय से दैनिक आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए आम आदमी का रुझान ऑनलाइन की तरफ बढ़ा है। इस कारण से साइबर अपराधी कई माध्यम से अंजाम दे रहे हैं, इसलिए कुछ सावधानी रखकर खुद को साइबर ठगी से बचा सकते हैं।
पुलिस प्रवक्ता एएसआई अमित कुमार ने कहा कि किसी भी अनजान व्यक्ति से अपना ओटीपी शेयर न करें। न ही किसी अनजान के साथ आधार नंबर, ई-मेल आईडी, सत्यापन कोड व अन्य किसी तरह की जानकारी साझा करें। किसी भी प्रकार का साइबर अपराध होने पर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर जानकारी दें। फोन कॉल, एसएमएस या अन्य किसी माध्यम से ओटीपी, यूपीआई पिन, एटीएम पिन और सीवीवी किसी के साथ भी शेयर न करें। एसएमएस व व्हाट्सएप के माध्यम से आए किसी भी लिंक पर क्लिक न करें। जब भी कोई पैसे भेजता है तो धनराशि अपने आप खाते में जमा हो जाती है। किसी के भी कहने पर रिमोट एक्सेस एप जैसे क्यूक स्पोर्ट, एनी डेस्क, एंड्रायड आदि को प्ले स्टोर से डाउनलोड न करें । न ही इनके आईडी व पासवर्ड किसी से शेयर करें। फोन, ई-मेल, एसएमएस या व्हाट्सएप पर आए नौकरी, लाटरी जैसे विज्ञापनों पर विश्वास न करें। एटीएम से पैसे निकालते या जमा करते समय किसी भी अनजान व्यक्ति की सहायता न लें। अपने एटीएम पिन को समय-समय पर बदलते रहें। फोन और एप को हमेशा नए वर्जन के साथ अपडेट रखें। सोशल नेटवर्किंग साइट्स पर जरूरत से ज्यादा निजी जानकारियां शेयर न करें।
डिजिटल हस्ताक्षर है ओटीपी, किसी से न करें साझा
पुलिस प्रवक्ता ने कहा कि स्मार्टफोन तिजोरी से कम नहीं है। इसमें आपकी हर गोपनीय जानकारी छिपी हुई है। आपका ओटीपी डिजिटल हस्ताक्षर है। इसे किसी के साथ साझा न करें। फोन पर आने वाले किसी भी लिंक पर क्लिक न करें। इससे आर्थिक हानि हो सकती है। अनजान वीडियो कॉल रिसीव न करें। जैसे लोन एप के झांसे में न आएं। अपरिचित नंबर से आए लिंक को क्लिक न करें अन्यथा आपका फोन हैक हो सकता है। ध्यान रखिए क्यूआर कोड पर स्कैन केवल पेमेंट करने वाले के लिए होता है, पेमेंट मांगने के लिए नहीं।