जींद। हरियाणा रोडवेज कर्मचारियों ने पांच और छह नवंबर की प्रस्तावित दो दिवसीय हड़ताल को लेकर तैयारियां तेज कर दी है। कर्मचारी जनसंपर्क अभियान चलाकर हड़ताल के समर्थन में संपर्क कर रहे हैं।
हरियाणा रोडवेज कर्मचारी सांझा मोर्चा के नेता जयबीर घणघस, जगदीप लाठर, वीरेंद्र सिंह, नीरज शर्मा ने कहा कि बुधवार को डिपो स्तर पर कर्मचारियों की बैठक हो सकती है। हड़ताल होने पर डिपो की बसों का संचालन प्रभावित होने से यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। रोडवेज कर्मचारियों को तीन नवंबर को परिवहन विभाग के महानिदेशक ने वार्ता के लिए बुलाया था।
हालांकि कर्मचारियों का कहना है कि पहले उनकी मानी जा चुकी मांगों का परिपत्र जारी किया जाए। उनका कहना है कि मांगों को पूरा करने का निर्णय परिवहन मंत्री या मुख्यमंत्री के स्तर पर ही हो सकता है। कर्मचारियों के अनुसार, यदि वार्ता के लिए औपचारिक पत्र जारी होता है और मानी हुई मांगों का परिपत्र जारी किया जाता है तो वे हड़ताल स्थगित करने पर विचार कर सकते हैं।
डिपो से रोजाना 15 हजार से अधिक यात्री करते हैं सफर
जींद डिपो में करीब 160 रोडवेज बसें हैं और इन पर लगभग 250 चालक व परिचालक कार्यरत हैं। डिपो की बसों में रोजाना 15 हजार से अधिक यात्री सफर करते हैं। इससे डिपो को प्रतिदिन करीब 10 लाख रुपये का राजस्व मिलता है। जींद से अलसुबह चंडीगढ़, हरिद्वार, यमुनानगर, गुरुग्राम और दिल्ली जैसे लंबे रूटों पर बसें चलती हैं। इसके बाद रोहतक, कैथल और भिवानी सहित अन्य रूटों पर बसों का संचालन होता है।
निजीकरण के विरोध में कर रहे हड़ताल
नेता संजीव कुमार, सुरेंद्र कुमार, कृष्ण नोहरा, श्रीभगवान, पवन साहरण, अशोक खोखर, अनूप लाठर, संदीप रंगा, सुरेंद्र सिंह और अमरजीत सिंह ने कहा कि हड़ताल केवल कर्मचारियों के हितों तक सीमित नहीं है, बल्कि हरियाणा रोडवेज के अस्तित्व, आम जनता को सस्ती सरकारी यात्रा सुविधा और युवाओं के रोजगार से जुड़ी है। आरोप लगाया कि सरकार निजी परमिट, किलोमीटर स्कीम और ठेके पर महंगी इलेक्ट्रिक बसें चलाकर रोडवेज का निजीकरण कर रही है। कर्मचारियों ने इसका विरोध करते हुए कहा कि वे इसे स्वीकार नहीं करेंगे।