जींद। धर्मांतरण के बाद एससी-एसटी आरक्षण खत्म होने के सुप्रीम कोर्ट के फैसले की विश्व हिंदू परिषद ने सराहना की है। जिला सलाहकार अरविंद शर्मा ने कहा कि यह निर्णय संविधान की मूल भावना, सामाजिक न्याय और विधि के शासन को मजबूत करने की दिशा में अहम कदम है।
सर्वोच्च न्यायालय ने स्पष्ट कर दिया है कि धर्मांतरण के बाद कोई भी व्यक्ति अनुसूचित जाति की श्रेणी में नहीं आता और उसे एससी/एसटी अधिनियम के तहत मिलने वाले विशेष संरक्षण का लाभ नहीं दिया जा सकता। उन्होंने कहा कि यह फैसला उन प्रवृत्तियों पर सख्त रोक लगाएगा जिनमें कुछ लोग धर्मांतरण के बाद भी पूर्व जातिगत पहचान के आधार पर आरक्षण और अन्य संवैधानिक लाभ लेने का प्रयास करते हैं।
उन्होंने कहा कि अनुसूचित जाति को दिए गए अधिकारों का उद्देश्य ऐतिहासिक सामाजिक अन्याय को दूर करना है जो विशेष रूप से पारंपरिक सामाजिक ढांचे में उत्पन्न हुआ था। उनका तर्क है कि धर्म परिवर्तन के बाद व्यक्ति उस सामाजिक संदर्भ से भी अलग हो जाता है जिसके आधार पर उसे ये विशेष अधिकार मिले थे।
उन्होंने कहा कि यह निर्णय सामाजिक समरसता, पारदर्शिता और न्याय व्यवस्था को मजबूत करेगा। साथ ही विहिप देशभर में ऐसे मामलों की पहचान करने की योजना बना रही है जहां कथित रूप से अनुसूचित वर्ग के अधिकारों का दुरुपयोग हुआ है ताकि वास्तविक लाभार्थियों तक उनका हक पहुंचाया जा सके।