वुमन विलेज बीबीपुर में बुधवार को ग्राम पंचायत तथा रोटरी क्लब ऑफ दिल्ली मिडटाउन की ओर से बेस्ट वुमेन शेफ प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। इसमें गांव की लगभग 150 महिलाओं ने भाग लिया।
बेस्ट वुमन शेफ प्रतियोगिता में देशी खाने से लेकर साउथ इंडियन व्यंजनों का तड़का लगा। महिलाएं घर से अपने साथ व्यंजन तैयार करके पहुंची थी। प्रतियोगिता में टेस्ट के साथ-साथ पौष्टिकता पर जोर रहा। इसके चलते प्रतियोगिता में शामिल अधिकतर महिलाओं द्वारा बाजरे की रोटी, बथुए की सब्जी, लस्सी, खिचड़ी, हलवे, खीर सहित अन्य देशी व्यंजनों पर जोर दिया गया था।
कुछ महिलाओं ने इडली, डोसा, उपमा, सांभर, पास्ता, फ्राइड राइस जैसे साउथ इंडियन व्यंजन भी तैयार किए थे। गांव के महिला शक्ति स्थल पर आयोजित इस प्रतियोगिता में निर्णायक मंडल ने बारी-बारी से सभी व्यंजनों को चखा और व्यंजन के स्वाद व पौष्टिकता के आधार पर अंक दिए।
हाली की थाली को मिला प्रथम पुरस्कार
प्रतियोगिता में गांव की अनपढ़ महिला बिमला द्वारा तैयार की गई हाली की थाली को प्रथम, पांचवीं पास मीना की बाजरे की रोटी, हरी सब्जी को दूसरा तथा अनपढ़ महिला मेहरो के देशी घी व खांड के चूरमे को तीसरा पुरस्कार मिला।
प्रथम पुरस्कार विजेता को कुकिंग किट, दूसरा स्थान प्राप्त करने वाली महिला को डीनर सैट, तृतीय स्थान हासिल करने वाली महिला को छह लीटर का प्रेशर कुकर व प्रशस्ती पत्र देकर सम्मानित किया गया। प्रतियोगिता में शामिल 100 महिलाओं को सांत्वना पुरस्कार दिए गए।
स्वाद के 10, पौष्टिकता के 20 अंक
बीबीपुर गांव के महिला शक्ति स्थल पर आयोजित इस प्रतियोगिता में व्यंजनों के स्वाद के साथ-साथ व्यंजनों की पौष्टिकता पर पूरा जोर दिया गया था। प्रतियोगिता का मुख्य उद्देश्य महिलाओं को पौष्टिक भोजन के प्रति जागरूक करना था। प्रतियोगिता कुल 40 अंक की रही। इसमें स्वाद के दस, पौष्टिकता के 20 तथा प्रस्तुतिकरण के दस अंक निर्धारित किए गए थे। महिला के कंधों पर पूरे परिवार के भोजन की जिम्मेदारी होती है। यदि महिला भोजन की पौष्टिकता के प्रति जागरूक हो तो पूरे परिवार का स्वास्थ्य सुधर सकता है।
सुनील जागलान, सरपंच, ग्राम पंचायत, बीबीपुर
साउथ इंडियन व्यंजनों की भी धूम
प्रतियोगिता में देशी खाने के साथ-साथ साऊथ इंडियन व्यंजनों की भी धूम रही। इसमें कृष्णा नाम की महिला द्वारा इडली, नारियल की चटनी, नीता नाम की महिला द्वारा उपमा, सोनिया नाम की महिला द्वारा फ्राइड राइस, साबू दाना, बबली द्वारा पास्ता, उपमा बनाया गया था।
पहले भोजन होता था पौष्टिक
पहले हाली (हल जोतने वाला किसान) को काफी शारीरिक परिश्रम करना पड़ता था। इसलिए हाली के खाने का पूरा ध्यान रखा जाता था। उसके खाने में बाजरे की रोटी, हरी सब्जी, खीर, देशी घी, शक्कर, गुड, लस्सी, प्याज ले जाया जाता था। पहले का खान-पान स्वादिष्ट होने के साथ-साथ पौष्टिक भी होता था। कई तरह का खाना होने के कारण खाने को बड़े टोकरे में रखकर ले जाया जाते थे। प्रतियोगिता के माध्यम से उसने अपने खाने में पुरानी परंपरा को दर्शाया है।
बिमला, प्रथम पुरस्कार विजेता
गुजरात से सीखा इडली बनाना
मेरे पति एयर फोर्स में नौकरी करते थे। मैं उनके साथ ही रहती थी। जब उनकी गुजरात में ड्यूटी थी तो वहीं से मैने इडली बनाना सीखा। दुकान की इडली से घर पर बनाई गई इडली स्वादिष्ट होती है और उसमें किसी प्रकार की मिलावट का भय भी नहीं रहता।
कृष्णा, प्रतिभागी महिला
ये रहे निर्णायक
जे करव इंटरनेशनल ऑर्गेनाइजेशन की प्रधान मृद्धा जोशी, रोटरी क्लब दिल्ली मिडटाउन के प्रधान भरत जोशी, फूड एंड टेक्नोलॉजी के लेक्चरर वेदपाल यादव, पंजाब डीआईजी इंटेलिजेंस ब्यूरो से सेवानिवृत्त अधिकारी जीएस सैनी, अमेरिका से आई दीपाली आर्या व दीपक आर्य ने निर्णायक मंडल की भूमिका निभाई।