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गरीब विद्यार्थियों को निजी स्कूलों दिलाया जाएगा दाखिला

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जींद। प्रदेश सरकार ने सरकारी स्कूलों में पढ़ रहे जरूरतमंद विद्यार्थियों को मान्यता प्राप्त निजी स्कूलों में दाखिला दिलवाने के लिए महत्वाकांक्षी योजना शुरू की है। इसके तहत निजी स्कूलों की सहमति से जिन अभिभावकों की वार्षिक सत्यापित आय 1.80 लाख रुपये या इससे कम है। उनके बच्चों का दूसरी से 12वीं कक्षा तक में दाखिला निजी मान्यता प्राप्त विद्यालयों में करवाया जाएगा। ऐसे बच्चों का शुल्क सरकार वहन करेगी।
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इस योजना के तहत विद्यालयों के पंजीकरण के लिए 23 अप्रैल से पोर्टल खोला जा रहा है। इसके लिए विभाग दूसरी से पांचवीं कक्षा तक के विद्यार्थी से प्रति छात्र 700 रुपये, कक्षा छठी से आठवीं तक प्रति छात्र 900 रुपये तथा कक्षा 9वीं से लेकर 12वीं तक प्रति छात्र 1100 रुपये मासिक फीस या फार्म छह में घोषित शुल्क राशि जो भी कम होगी वह विद्यालयों को अदा की जाएगी। निजी मान्यता प्राप्त स्कूलों से रजिस्ट्रेशन के लिए 30 अप्रैल तक आवेदन मांगे गए हैं। इसके बाद दाखिले की तिथि घोषित की जा सकती है। जिले भर में 398 निजी स्कूल हैं। वहीं पहले नियम 134ए में सभी स्कूलों को दूसरी से 12वीं कक्षा तक दस प्रतिशत सीटें आरक्षित रखनी होती थी। वहीं अब जो योजना शुरू की गई है, उसके अंतर्गत इच्छुक स्कूलों से आवेदन मांगे गए हैं। सभी स्कूल विद्यार्थियों को दाखिला देने के लिए बाध्य नहीं होंगे। वहीं अभिभावक अभी से शिक्षा विभाग के अधिकारियों के पास पोर्टल बंद होने की शिकायत को लेकर फोन कर रहे हैं, जबकि अभी पोर्टल केवल स्कूलों से आवेदन मांगने के लिए खोला गया है। 30 अप्रैल तक इच्छुक स्कूल जो विद्यार्थियों को शिक्षा विभाग द्वारा निर्धारित की गई फीस के तहत पढ़ाना चाहेंगे, वह स्कूल पोर्टल पर आवेदन करेंगे। इसके बाद स्कूलों की संख्या देखी जाएगी और दाखिले को लेकर शेड्यूल जारी हो सकता है।
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इच्छुक स्कूल 30 अप्रैल तक कर सकते हैं आवेदन
जरूरतमंद विद्यार्थियों को मान्यता प्राप्त निजी स्कूलों में दाखिला दिलवाने के लिए महत्वाकांक्षी योजना शुरू की है। इसके अंतर्गत निजी स्कूलों की सहमति से दूसरी से 12वीं कक्षा में विद्यार्थियों को दाखिले दिए जाएंगे। इस संबंध में इच्छुक विद्यालय 30 अप्रैल तक आवेदन कर सकते हैं। जिन अभिभावकों की वार्षिक आय एक लाख 80 हजार रुपये से कम है उन छात्रों के दाखिले करवाए जाने हैं।-सुशील कुमार जैन खंड शिक्षा अधिकारी।
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