जींद। जिले में हवा की गुणवत्ता में सुधार नहीं होने के चलते आमजन की परेशानी बढ़ती जा रही है। शुक्रवार को औसत एक्यूआई 309 रहा, जबकि यह अधिकतम 356 तक पहुंच गया था। लगातार प्रदूषण का स्तर अधिक रहने से स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। सुबह और शाम स्मॉग अधिक रहता है। हवा में तैर रहे बारीक कण वातावरण में ऊपर नहीं जा रहे हैं। इससे आंखों में जलन और सांस के रोगियों को परेशानी हो रही है। जो व्यक्ति पूरी तरह स्वस्थ हैं, उनका गला खराब हो रहा है और आंखों में जलन भी हो रही है। यदि लगातार यही स्थिति बनी रही तो यह खतरनाक साबित होगा। वहीं जो लोग पहले से बीमार हैं, उन पर ज्यादा असर दिखाई दे रहा है। इस प्रदूषण का असर व्यक्ति के फेफड़ों पर होने लगा है।
दिवाली पर हुई आतिशबाजी के बाद से प्रदूषण लगातार बढ़ रहा है। एक्यूआई 300 से अधिक होने के कारण यह रेड जोन में आ गया है, जो स्वास्थ्य के लिए काफी खतरनाक है। प्रदूषण का यह स्तर सांस के रोगियों, बच्चों और बुजुर्गों के लिए बेहद खतरनाक है। आंखों में लगातार प्रदूषण के कण जाने से जलन बढ़ रही है। विशेष कर दमा के मरीजों को इस मौसम से काफी परेशानी उठानी पड़ रही है।
यूं तो पिछले कई साल से जींद का एक्यूआई 400 से ऊपर जाता है, लेकिन इस बार प्रशासन ने फसल अवशेष जलाने से रोकने के लिए सख्ती की हुई है। सख्ती का असर यह है कि पराली जलाने के मामले कम आ रहे हैं। इसके बावजूद प्रदूषण बढ़ रहा है।
हवा की गति कम रहना बढ़ा रहा परेशानी
शुक्रवार को अधिकतम 31 और न्यूनतम 18 डिग्री सेल्सियस तापमान दर्ज किया गया। मौसम में आर्द्रता 48 प्रतिशत रही तो हवा की गति मात्र तीन किलोमीटर प्रतिघंटा रही। हवा की गति कम रहने के चलते भी पर्यावरण प्रदूषण से निजात नहीं मिल पा रही है। कार्बन व प्रदूषण के कण वातावरण में ऊपर नहीं जा पाते हैं। मौसम विशेषज्ञ के अनुसार धीरे-धीरे ठंड बढ़ने की संभावना है। मौसम खुश्क रहेगा और धीमी गति से उत्तरी हवा चल सकती है। इससे दिन और रात के तापमान में मामूली गिरावट होने की संभावना है। ठंड रहने के चलते सुबह और शाम के समय स्मॉग छाएगा।
यह रहा शुक्रवार को एक्यूआई
समय
एक्यूआई
5 बजे सुबह
297
6 बजे
303
7 बजे
309
8 बजे
315
9 बजे
320
10 बजे
327
12 बजे
316
3 बजे
309
सांस के रोगियों के लिए खतरनाक है प्रदूषण : डाॅ. भोला
नागरिक अस्पताल के डिप्टी सिविल सर्जन डाॅ. राजेश भोला ने कहा कि पर्यावरण प्रदूषण से रोग प्रतिरोध क्षमता कमजोर होती है। ऐसे में प्रदूषण के दौरान सीधे हवा के संपर्क में आने से बचें। आंखों को बार-बार सामान्य पानी से साफ करते रहें। अधिक खुजली या जलन होने पर नेत्ररोग विशेषज्ञ को दिखाएं। आतिशबाजी से हवा की गुणवत्ता पर बुरा प्रभाव पड़ा है। इससे सांस के रोगियों को परेशानी होनी स्वाभाविक है। सांस लेने में कठिनाई होती है। विशेषकर शारीरिक श्रम के दौरान ज्यादा परेशानी होती है।