28जेएनडी08: मोरखी गांव में वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ यज्ञ करते हुए आर्य समाज के सदस्य। स्रोत:
जींद। आर्य समाज मोरखी की ओर से श्रावणी पर्व श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया गया। कार्यक्रम में आर्य समाज के सदस्यों और श्रद्धालुओं ने बढ़-चढ़कर भाग लिया। वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ यज्ञ का आयोजन किया गया। यज्ञ में श्रद्धालुओं ने आहुतियां डालकर सुख-शांति और समाज के कल्याण की कामना की।
कार्यक्रम में महेंद्र ने श्रावणी पर्व के धार्मिक एवं सामाजिक महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि श्रावणी पर्व भारतीय संस्कृति और वैदिक परंपराओं से जुड़ा महत्वपूर्ण पर्व है। यह पर्व व्यक्ति को अपने संस्कारों, कर्तव्यों और सामाजिक जिम्मेदारियों का स्मरण कराता है। उन्होंने आर्य समाज के सदस्यों से आपसी भाईचारा, प्रेम और एकता बनाए रखने का आह्वान किया।
कार्यक्रम के दौरान यज्ञोपवीत (जनेऊ) के महत्व के बारे में भी श्रद्धालुओं को जानकारी दी गई। वक्ताओं ने कहा कि यज्ञोपवीत केवल धार्मिक परंपरा नहीं, बल्कि ज्ञान, अनुशासन, कर्तव्य और संस्कारों का प्रतीक है। इस दौरान विधि-विधान के साथ पुराने यज्ञोपवीत का त्याग कर नया यज्ञोपवीत धारण कराया गया।
वैदिक संस्कृति और आर्य समाज के सिद्धांतों को जन-जन तक पहुंचाने के लिए सामूहिक प्रयास जरूरी हैं। समाज के सभी सदस्यों को मिलकर सामाजिक बुराइयों के खिलाफ जागरूकता फैलाने और युवा पीढ़ी को संस्कारों से जोड़ने का प्रयास करना चाहिए।
कार्यक्रम के समापन पर उपस्थित लोगों ने समाज में एकता, सद्भाव और भाईचारा बनाए रखने के साथ वैदिक संस्कृति के प्रचार-प्रसार का संकल्प लिया। इस अवसर पर महेंद्र, सेवा सिंह, सुल्तान सिंह, विजेंद्र, सुनील और सुरेंद्र आर्य सहित अन्य सदस्य मौजूद रहे।