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Jind News: 26 सितंबर से शुरू होगा पितृपक्ष, 10 अक्तूबर को सर्वपितृ अमावस्या

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फोटो 25जेएनडी14-प्राचीन राधा कृष्ण मंदिर पुजारी सत्यनारायण शांडिल्य।
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उचाना। पितृपक्ष की शुरुआत 26 सितंबर से होगी और इसका समापन 10 अक्तूबर को सर्वपितृ अमावस्या के साथ होगा। हिंदू परंपरा के अनुसार पितृपक्ष में पूर्वजों की तिथि के अनुसार श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान किया जाता है। इस दौरान लोग पितरों की शांति एवं सद्गति के लिए विधिपूर्वक पूजा-अर्चना कर दान-पुण्य करते हैं।
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प्राचीन राधा कृष्ण मंदिर के पुजारी सत्यनारायण शांडिल्य ने बताया कि पितरों की निर्धारित तिथि पर जल, तिल और कुश से तर्पण करने की परंपरा है। श्रद्धालु अपनी सामर्थ्य के अनुसार ब्राह्मण भोजन करवाकर दान-पुण्य भी करते हैं। उन्होंने बताया कि पितृपक्ष को पूर्वजों के प्रति श्रद्धा और कृतज्ञता व्यक्त करने का अवसर माना जाता है।
उन्होंने बताया कि यदि किसी पूर्वज की मृत्यु तिथि ज्ञात नहीं है या निर्धारित तिथि पर किसी कारणवश श्राद्ध नहीं किया जा सका हो, तो सर्वपितृ अमावस्या के दिन श्राद्ध एवं तर्पण किया जा सकता है। इस दिन ज्ञात-अज्ञात सभी पितरों के निमित्त श्रद्धापूर्वक तर्पण, पिंडदान और दान करने की परंपरा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इससे पितरों का आशीर्वाद प्राप्त होता है।
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पितृपक्ष में ये कार्य करने की परंपरा

पितरों की तिथि के अनुसार श्राद्ध करें। जल, तिल और कुश से तर्पण करें। ब्राह्मण भोजन करवाकर यथाशक्ति दान करें। कौआ, गाय और जरूरतमंद लोगों को भोजन करवाएं। पितरों का स्मरण कर उनकी शांति एवं सद्गति की प्रार्थना करें।
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