सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर हटाए गए 1983 शरीरिक शिक्षा अध्यापकों की सेवाएं दोबारा बहाली की मांग को लेकर शिक्षकों ने धरना दिया। शारीरिक शिक्षक संघर्ष समिति के राज्य वरिष्ठ उपप्रधान वजीर गांगोली ने कहा कि सरकार सुप्रीम कोर्ट की आड़ में उनका रोजगार छीनने का प्रयास कर रही है। इसे सहन नहीं किया जाएगा। उच्चतम न्यायालय के फैसले में कही भी शिक्षकों को दोषी नहीं पाया गया।
शिक्षक रामस्नेही, प्रवीण, महेंद्र व जोगिंद्र क्रमिक अनशन पर बैठे। धरने को हरियाणा विद्यालय अध्यापक संघ, सर्व कर्मचारी संघ, प्राइमरी अध्यापक संघ, संस्कृतिक अध्यापक संघ, हरियाणा अनुसूचित संघ, सीपीआईएम, शारीरिक शिक्षक संघ सहित विभिन्न संगठनों के पदाधिकारियों ने धरनास्थल पर पहुंच कर समर्थन दिया।
उचाना में पीटीआई सुरेंद्र उचाना कलां, राजकुमार काकड़ौद, आजाद खेड़ी मंसानियां, मनीषा बधाना एक दिन के क्रमिक अनशन पर रहे। एसडीएम राजेश कोथ के माध्यम से मुख्यमंत्री मनोहर लाल व उपमुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला के नाम ज्ञापन देते हुए सेवाओं को बहाल करने की मांग की गई।
वजीर गांगोली ने कहा कि पीटीआई की बहाली की मांग को लेकर एक दिवसीय क्रमिक अनशन शुरू कर धरना दिया गया है। 15 जून से जिलास्तर पर अनिश्चितकालीन धरना दिया जाएगा। सरकार इसके बाद भी उनकी कोई सुध नहीं करेगी तो प्रदेश स्तरीय आंदोलन करने पर शिक्षक मजबूर होंगे। शिक्षक अपना रोजगार बचाने के लिए हर कुर्बानी देने के लिए तैयार हैं। इस अवसर पर प्रधान देवेंद्र कुमार, जोगेंद्र, सूरत नेहरा, जगजीत सिंह, नीरज कुमारी, सीमा बूरा, अनूप लाठर, सुरेंद्र मान, देवीलाल जुलानी, प्रदीप कुमार, देवेंद्र फौजी मौजूद रहे। वहीं
जुलाना में हटाए गए पीटीआई शिक्षकों के विरोध में खंड शिक्षा अधिकारी कार्यालय में महेंद्र सिंह की अध्यक्षता में धरना दिया गया। धरने में दर्जनों पीटीआई ने सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी करते हुए रोष प्रकट किया। महेंद्र सिंह ने कहा कि सरकार 1983 शारीरिक शिक्षकों के साथ अन्याय कर रही है। 10 साल के कार्यकाल में शिक्षकों के कागजात की तीन से चार बार जांच की जा चुकी है। कर्मचारी चयन आयोग की गलतियों का ठीकरा उन पर फोड़ा जा रहा है। इस व्यवहार से लगता है कि यह मामला पूरी तरह से राजनीतिक है और राजनीति के कारण ही अध्यापकों को बलि का बकरा बनाया जा रहा है।
अपनी बहाली की मांग को लेकर अनशन पर बैठे हटाए गए शारीरिक शिक्षक।- फोटो : Jind