जींद। शहर के प्राचीन राधा-कृष्ण मंदिर के पुजारी भारतेंदु शांडिल्य ने मंगलवार को कहा कि मनुष्य ही एक मात्र ऐसा प्राणी है जिसका व्यक्तित्व निर्माण प्रकृति से ज्यादा उसकी स्वयं की प्रवृत्ति पर निर्भर होता है।
मनुष्य के अलावा अन्य किसी प्रणाली में बेहतर बनने की कोई संभावना नहीं होती है। उन्होंने कहा कि मनुष्य में जीवन के अंतिम क्षणों तक विचार परिवर्तन से जीवन परिवर्तन के द्वार सदा खुले रहते हैं। वह अपने जीवन को अपने अनुसार उत्कृष्ट या निकृष्ट बना सकने में समर्थ होता है। संवाद