13जेएनडी08 : स्कीम नंबर 19 में स्थित जिले का मुख्य डाकघर, जहां खोला जाना था पासपोर्ट ऑफिस। संवा
जींद। 1 नवंबर 1966 को हरियाणा के साथ ही जींद जिला अस्तित्व में आ गया था, मगर लोगों को आज तक पासपोर्ट ऑफिस की सुविधा नहीं मिल पाई है, जबकि जींद के बाद बनाए गए जिलों कैथल और सोनीपत में इसकी सुविधा हो चुकी है। जींद में पासपोर्ट ऑफिस नहीं होने के कारण यहां के लोगों को दूसरे जिलों में साक्षात्कार के लिए जाना पड़ता है। ऐसे में लोगों का समय और पैसा दोनों बर्बाद होता है।
जींद में पासपोर्ट ऑफिस खोलने के लिए कई बार प्रयास हुए, मगर कामयाबी नहीं मिली। इस कारण जींद के लोगों को पासपोर्ट बनवाने के लिए कैथल, सोनीपत या अंबाला जाना पड़ता है। इसमें उनका काफी समय और पैसा बर्बाद होता है। हरियाणा गठन के दौरान जींद प्रदेश का सातवां जिला बनाया गया था। प्रदेश के सबसे पुराने और बड़े जिलों में शुमार जींद में पासपोर्ट ऑफिस एक सपना ही बनकर रह गया है। केंद्र सरकार ने पासपोर्ट कार्यालय का युद्ध स्तर पर विस्तार किया है। इसके तहत प्रदेश के कई जिलों में पासपोर्ट ऑफिस खोले गए हैं। जब सरकार ने यह योजना शुरू की थी तब जींद को भी पासपोर्ट ऑफिस मिलने की उम्मीद थी। इसके लिए जींद की स्कीम नंबर 19 के नए मुख्य डाकघर को रीजनल पासपोर्ट ऑफिस के रूप में विकसित करने की योजना भी बनी थी। इसके लिए अधिकारियों ने निरीक्षण भी किया था। निरीक्षण में यह पाया गया था कि जींद के मुख्य डाकघर में पासपोर्ट ऑफिस के लिए पर्याप्त जगह है। यहां बहुत आसानी से पासपोर्ट ऑफिस खोला जा सकता है। उस समय जींद के लोगों को उम्मीद बनी थी कि पासपोर्ट ऑफिस खुल जाएगा, लेकिन उनकी यह इच्छा पूरी नहीं हो सकी।
पासपोर्ट के लिए हर महीने हजार से ज्यादा आते हैं आवेदन
जिले से हर महीने एक हजार से ज्यादा लोग पासपोर्ट के लिए आवेदन करते हैं। इनमें युवाओं की संख्या सबसे ज्यादा है। इन लोगों को पासपोर्ट बनवाने के लिए कैथल, अंबाला, पानीपत जाना पड़ता है। कई बार तो जयपुर, शिमला तक जींद के युवा पासपोर्ट के लिए जाते हैं।
जींद में पासपोर्ट ऑफिस खुलवाने का प्रयास किया जाएगा। इसके लिए जल्द ही विदेश मंत्रालय से बातचीत की जाएगी। -सतपाल ब्रह्मचारी, सांसद, सोनीपत लोकसभा क्षेत्र।
13जेएनडी08 : स्कीम नंबर 19 में स्थित जिले का मुख्य डाकघर, जहां खोला जाना था पासपोर्ट ऑफिस। संवा