जींद। प्रदेश सरकार ने यात्रियों की सुविधा के लिए वर्ष 2020 से पहले पिंडारा गांव के पास 32 करोड़ रुपये की लागत से नए बस अड्डे का निर्माण करवाया था। बस स्टैंड पर यात्रियों को पेयजल मुहैया करवाने के लिए बोरवेल पर लगभग 23 लाख रुपये खर्च किए थे, लेकिन अभी भी यात्रियों के कंठ तर नहीं हो रहे हैं, क्योंकि बोरवेल का पानी खारा होने के साथ उसमें टीडीएस की मात्रा इतनी ज्यादा है कि उसे कोई पी नहीं सकता। जिला प्रशासन ने भी यात्रियों की प्यास बुझाने के लिए कोई प्रयास नहीं किया है।
बस अड्डे पर प्रतिदिन हजारों लोगों का आना-जाना रहता है। यात्रियों का सहारा दो पानी के टैंकर बने हुए है, जिनको शहर के एक समाजसेवी रखवाते हैं। दो साल से इन पानी के टैंकों के सहारे यात्रियों की प्यास बुझाई जा रही है। पानी का टीडीएस ज्यादा होने से यात्री वाटर कूलर का पानी पीने से बचते हैं। पानी इतना खराब है कि छत पर रखी टंकियों का रंग भी पीला पड़ गया है। यात्रियों को पीने के लिए शुद्ध पानी मिले, इसके लिए बस स्टैंड पर 500 लीटर की क्षमता वाला बड़ा आरओ प्लांट लगाया गया है। भूतल पर दो, प्रथम तल पर एक वाटर कूलर लगाया गया है, लेकिन पानी खराब होने की वजह से लोग वाटर कूलर का पानी नहीं पी रहे हैं। कर्मचारियों के लिए भी स्पेशल पानी के कैंपर मंगाए जाते हैं। जींद डिपो में इस समय लगभग 200 बसें हैं, जिनके माध्यम से रोजाना 16 हजार से अधिक यात्री सफर करते हैं।
2015 में शुरू हुआ था बस स्टैंड का निर्माण कार्य
वर्ष 2015 में नए बस अड्डे का निर्माण शुरू हुआ था। इसके बाद यह वर्ष 2020 में बनकर तैयार भी हो गया। इस पर 32 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं। इसके प्रथम तल पर महाप्रबंधक कार्यालय, चालक-परिचालकों के लिए डोर मैटरी जैसी सुविधाएं हैं तो भूतल पर पुलिस पोस्ट, रेस्टोरेंट, एक क्लाक रूम, 15 दुकानें, महिला प्रतीक्षालय, दो एटीएम बूथ बनाए गए हैं। बसों के 18 बूथ बनाए गए हैं। बसें खड़ी करने के लिए सात एकड़ जमीन खाली छोड़ी गई है। पांच एकड़ में वर्कशॉप का निर्माण किया गया है, लेकिन छह महीने से कैंटीन व अन्य दुकानें भी खाली पड़ी हुई हैं।
बस स्टैंड परिसर में पेयजल की समस्या के समाधान के लिए प्रशासन गंभीर है। बस स्टैंड परिसर में रखे गए वाटर टैंकों से काम चल रहा है। उम्मीद है कि जल्द ही समस्या का समाधान हो जाएगा। -राहुल जैन, महाप्रबंधक, रोडवेज डिपो, जींद।
10जेएनडी10-बस अड्डे पर समाजसेवी द्वारा रखवाए गए वाटर टैंक से पानी पीते यात्री। संवाद