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फीस बढ़ाने के विरोध में अभिभावकों ने स्कूल के खिलाफ किया प्रदर्शन

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अभिभावकों को समझाते पुलिसकर्मी। संवाद - फोटो : Jind
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डीएवी पब्लिक स्कूल में पढ़ने वाले विद्यार्थियों के अभिभावकों व कुछ संगठनों ने शुक्रवार सुबह स्कूल प्रशासन पर अवैध रूप से फीस बढ़ाने का आरोप लगाते हुए रोष प्रकट किया। अभिभावकों के रोष को देखते हुए सिविल लाइन थाना पुलिस मौके पर पहुंची और कोरोना नियमों का पालन करते हुए शांतिपूर्वक से अपनी मांग स्कूल प्रशासन के सामने रखने की बात कही। वहीं उक्त स्कूल संस्थाओं के क्षेत्रीय निदेशक ने कहा कि फीस सरकार व अदालत के निर्देशानुसार ही ली जा रही है। जरूरतमंद अभिभावकों को वैसे ही छूट दी जा रही है। यदि कोई परेशानी है तो प्रदर्शन से पहले बातचीत करनी चाहिए।
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अभिभावकों ने कहा कि स्कूल प्रशासन द्वारा इस सत्र की शुरुआत में उनसे दाखिला फीस 25 प्रतिशत बढ़ाकर ली जा रही है। जबकि सरकार के आदेश केवल मासिक फीस लेने के हैं। इसके अलावा जब वे अपने बच्चों का एसएलसी लेने जाते हैं तो पिछले साल की बकाया फीस के नाम पर आठ से दस हजार रुपये लिए जा रहे हैं। विकास शुल्क व मरम्मत शुल्क के भी पैसे लिए जा रहे हैं। जबकि कोरोना संक्रमण के चलते विद्यार्थियों की कक्षा ऑनलाइन चल रही है।
अभिभावकों ने कहा कि कोरोना संक्रमण के कारण ज्यादातर अभिभावकों का रोजगार प्रभावित हुआ है। जो अभिभावक दाखिला फीस भरने में असमर्थ हैं उनके बच्चों के नाम ऑनलाइन कक्षा के ग्रुप से हटा दिए जा रहे हैं। इससे बच्चों का मानसिक उत्पीड़न हो रहा है। अभिभावकों व विद्यार्थियों के हित के लिए चाहिए कि स्कूल प्रशासन बढ़ी हुई फीस वापस ले।
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क्षेत्रीय निदेशक ने बुलाया बातचीत के लिए
अभिभावकों के रोष प्रदर्शन को देखते हुए स्कूल प्रशासन ने अभिभावकों को बातचीत के लिए अंदर बुलाया। इस दौरान लगभग 20 अभिभावक बातचीत के लिए गए, लेकिन कुछ देर बाद वे बाहर आ गए। अभिभावकों ने कहा कि स्कूल प्रशासन ने उनके साथ दुर्व्यवहार किया। इसके बाद अभिभावक लघु सचिवालय परिसर में डीसी डॉ. आदित्य दहिया को ज्ञापन देने पहुंचे।
25 प्रतिशत बढ़ाई फीस
स्कूल प्रशासन ने 25 से 30 प्रतिशत तक ट्यूशन फीस बढ़ा दी है। वहीं दाखिला फीस भी अभिभावकों से ली जा रही है, जो गैरकानूनी है। फीस नहीं जमा करवाने पर विद्यार्थियों को ऑनलाइन कक्षा के ग्रुप से हटाया जा रहा है। जिसकी वजह से उनकी पढ़ाई प्रभावित हो रही है। विद्यार्थी एक साल से स्कूल नहीं गए, लेकिन स्कूल प्रशासन द्वारा डेवलपमेंट चार्ज व मेंटेनेंस चार्ज के नाम पर वसूली की जा रही है।
रवि कुमार, अभिभावक।
अभिभावकों पर बनाया जा रहा दबाव
दाखिला फीस में डेवलपमेंट चार्ज व मेंटेनेंस चार्ज लिया जा रहा है। जब बच्चे स्कूल में नहीं आ रहे हैं तो डेवलपमेंट चार्ज व डेवलपमेंट चार्ज किस नाम का लिया जा रहा है। अभिभावकों पर दाखिला फीस भरने के लिए दबाव बनाया जा रहा है। विद्यार्थियों को ऑनलाइन ग्रुप से हटाया जा रहा है। इससे बच्चे अपने आप को अपमानित महसूस कर रहे हैं।
धर्मबीर, अभिभावक
सभी अभिभावक इस बात पर सहमत थे कि अभिभावकों से पिछले साल की तरह ट्यूशन फीस लेते रहे, लेकिन अब अभिभावकों से दाखिला फीस मांगी जा रही है। इसके विरोध में वे एकत्रित हुए। बच्चे का एसएलसी के नाम पर रुपये लिए जा रहे हैं। हाईकोर्ट के आदेश पर उनसे जबरदस्ती डेवलपमेंट चार्ज लिए जा रहे हैं।
नवीन, अभिभावक
एसएलसी के नाम पर मांगे जा रहे रुपये
स्कूल प्रशासन द्वारा दाखिला फीस लेने पर जब अभिभावक अपने बच्चों को दूसरे स्कूल में पढ़ाना चाहते हैं तो स्कूल प्रशासन एसएलसी के नाम पर सात से आठ हजार रुपये मांगर रहा है। यह अभिभावक व बच्चों के साथ ठगी है। हाईकोर्ट के आदेशों के नाम पर अभिभावकों से अवैध वसूली की जा रही है।
रेखा, अभिभावक।
स्कूल बच्चों के लिए विकास और शिक्षा का मंदिर है, जिसकी पवित्रता बनाए रखना सबका धर्म है। एक निजी स्कूल के सभी अध्यापक कटिबद्ध हैं कि किसी भी बच्चे को कोरोना संकट के समय आर्थिक कारण से पढ़ाई नहीं छोड़ने पड़े। इसलिए स्कूल के स्टाफ ने आपस में रुपये एकत्रित करके स्कूल के बच्चों की फीस दी है। सभी अभिभावकों से बात करने तथा समाधान करने का प्रयास किया गया, लेकिन अभिभावकों ने कोई बात नहीं सुनी। अभिभावकों ने स्कूल प्रशासन से बात करने से इनकार कर दिया और स्कूल के गेट पर प्रदर्शन जारी रखा। स्कूल के बार-बार अनुरोध पर भी वे लोग पीछे नहीं हटे। पता लगा है कि उनमें से अधिकांश के बच्चे भी स्कूल में नहीं पढ़ते तथा कुछ लोगों ने स्कूल में झूठ बोलकर अपने बच्चों की फीस माफ करवा रखी है। वह भी प्रदर्शन में शामिल थे। यह स्कूल को बदनाम करने की साजिश है। स्कूल सुप्रीम कोर्ट व सरकार के आदेशों के अनुसार फीस ले रहा है। संस्था सरकार तथा कोर्ट के नियमों का आदर करती है। उसी प्रकार से संचालित होती है। इसके अतिरिक्त सदा अभिभावकों और बच्चों की मदद को तैयार रहती है। कोई भी व्यक्ति किसी भी समय अपनी समस्या रख सकता है। यद्यपि हरियाणा सरकार ने ग्रीष्मकालीन अवकाश घोषित कर दिया है, जिसके अनुसार स्कूल को बंद कर दिया गया है। स्कूल का नया सत्र नियमानुसार एक जून से शुरू होगा या सरकार का जो भी आदेश होगा उसका पालन किया जाएगा।
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डॉ. धर्मदेव विद्यार्थी, प्राचार्य डीएवी पब्लिक स्कूल।

फीस बढ़ोतरी के विरोध में नारेबाजी करते अभिभावक। संवाद- फोटो : Jind

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