जींद। तहसील में सप्ताह से कागज ही नहीं है। ऐसे में लोगों को जमाबंदी, इंतकाल करवाने के लिए बाजार से खुद कागज लाने पड़ रहे हैं। लोग बुधवार को तहसीलदार शालिनी लाठर से मिले लेकिन समाधान नहीं हुआ।
तहसील में एक सप्ताह से कागज खत्म होने के कारण आम लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। तहसील में रोजाना बड़ी संख्या में लोग अपने जरूरी कार्यों के लिए पहुंचते हैं लेकिन कागज उपलब्ध न होने के कारण उनका काम अटक रहा है। लोगों को जवाब मिलता है कि तहसील में कागज नहीं है। इसलिए लोगों को बाहर कागज खरीदने में समय और पैसा दोनों खर्च हो रहा है।
सतीश, रामकेश, सूरजभान, सुरेंद्र, दीपक का कहना है कि सरकार डिजिटल और पेपरलेस व्यवस्था की बात करती है। वहीं दूसरी ओर तहसील जैसे महत्वपूर्ण कार्यालय में बुनियादी सुविधाओं का भी अभाव है। सरकारी फीस देने के बावजूद उन्हें अतिरिक्त रूप से कागजों पर खर्च करना पड़ रहा है जो पूरी तरह से गलत है।
उन्होंने कहा कि वे समस्या से परेशान होकर बुधवार को तहसीलदार शामिनी लाठर से मिले। लेकिन समाधान नहीं हुआ। केवल आश्वासन देकर मामला टाल दिया गया।
वर्जन
तहसील में जमाबंदी को लेकर आया था लेकिन यहां आने के बाद पता चला कि तहसील में कागज ही नहीं है। इसके बाद बाजार से कागज खरीदकर लाना पड़ा।
-अनिल कुमार, ईंटल खुर्द
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तहसील में जमाबंदी के लिए सुबह ही लाइन में लगा गया। जब मेरा नंबर आया तो पता चला कि कागज खत्म हो गए हैं। फिर बाजार से कागज लाकर दोबारा लाइन में लगना पड़ा।
-मोहित, बरसोला
वर्जन
सभी एसडीएम को फंड उपलब्ध करवाया हुआ है। यदि इस तरह की कोई दिक्कत आती है तो तुरंत व्यवस्था कराई जाएगी।
-मोहम्मद इमरान रजा, डीसी जींद
22जेएनडी15-तहसील में खत्म होने के बाद बाजार से कागज लेकर पहुंचे लोग। संवाद
22जेएनडी15-तहसील में खत्म होने के बाद बाजार से कागज लेकर पहुंचे लोग। संवाद