जिले में मेडिकल कॉलेज के निर्माण की योजना पर पेच फंस गया है। मेडिकल कॉलेज के लिए साइट फाइनल होने के बाद हैबतपुर गांव की पंचायत द्वारा तय की गई शर्तों पर मेडिकल शिक्षा एवं शोध विभाग कोई फैसला नहीं कर पाया हैै। ऐसे में ग्राम पंचायत ने मेडिकल कॉलेज के लिए दी गई जमीन की इसी माह बोली कराने का फैसला लिया है।
बता दें कि 26 दिसंबर 2014 को मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने जींद में मेडिकल कॉलेज की घोषणा की थी। इसके बाद मेडिकल एजुकेशन एंड रिसर्च विभाग द्वारा छह महीने पहले ही हैबतपुर गांव की पंचायत द्वारा दी गई जमीन को मेडिकल कॉलेज के लिए तय किया था। इसके बाद से मेडिकल कॉलेज के निर्माण की प्रक्रिया भी शुरू हुई और पीडब्ल्यूडी बीएंडआर ने इसके लिए करीब 200 करोड़ रुपये की परियोजना का प्रस्ताव मेडिकल एजुकेशन एंड रिसर्च विभाग को भेजा। इसी प्रक्रिया के बीच हैबतपुर गांव की पंचायत ने पांच शर्तें लगा दी हैं, जिससे पूरी परियोजना पर ब्रेक लग गए हैं। अब नई शर्तों पर प्रदेश सरकार और मेडिकल एजुकेशन और रिसर्च विभाग कोई फैसला नहीं ले पा रहा है।
विभाग ने तय की है साइट
मेडिकल कॉलेज के निर्माण के लिए हैबतपुर गांव की पंचायत ने 24 एकड़, तीन कनाल व तीन मरले जमीन दी है। पहले गांव की पंचायत हैबतपुर में ही मेडिकल कॉलेज और ओपीडी की मांग कर रही थी, लेकिन इसके लिए 300 बेड का अस्पताल जरूरी होने के कारण यह साइट नागरिक अस्पताल में तय की गई। यहां 200 बेड का अस्पताल तैयार है। इसके बाद तय हुआ कि हैबतपुर गांव में मेडिकल की सहायक शाखाएं और चिकित्सकों के क्वार्टर और क्लासरूम बनाए जा सकते हैं। इस पर भी गांव की पंचायत सहमत हो गई, लेकिन नई शर्तों के आने से नई मुश्किलें खड़ी हो गईं हैं।
डेंटल कॉलेज भी बनेगा
मेडिकल कॉलेज के नॉर्म्स के अनुसार डेंटल कॉलेज भी बनाया जाना होता है। इसके लिए हैबतपुर की साइट को ही प्राथमिकता दी जा रही है। हालांकि, हैबतपुर की पंचायत मेडिकल कॉलेज की ओपीडी गांव में चाहती है, लेकिन नागरिक अस्पताल की साइट पर पहले से ही 200 बेड का अस्पताल बना हुआ है। ऐसे में यहां जल्द काम शुरू करने के लिए नागरिक अस्पताल की साइट को ही प्राथमिकता दी जा रही है।
ये हैं पंचायत की शर्तें
1. मेडिकल कॉलेज में आने वाले सभी कोर्सों में पांच सीटें गांव के उम्मीदवारों के लिए निर्धारित की जाएं।
2. तीसरे और चौथे दर्जे के कर्मचारियों की भर्ती में 50 प्रतिशत नियुक्ति गांव के युवाओं की हो।
3. कैंटीन और पार्किंग के ठेके से होने वाली आय ग्राम पंचायत को दी जाए। या पार्किंग व कैंटीन का ठेका पूर्ण रूप से पंचायत के अधिकार क्षेत्र में हो।
4. जो जमीन मेडिकल कॉलेज के लिए दी है, वहां डेढ़ एकड़ जमीन गांव के गंदे पानी की निकासी के लिए भी है। यह जमीन दिए जाने से गांव के गंदे पानी की निकासी में दिक्कत आएगी। ऐसे में गांव को सीवर लाइन से जोड़ा जाए।
ग्राम पंचायत ने पहले भी अपनी मांगें सरकार और अधिकारियों भेजी थी, अब वीरवार को ग्राम पंचायत ने बैठक इन सभी मांगों का प्रस्ताव पास किया है। यह सरकार को भेजा जाएगा। ये मांगें पूरी नहीं होने पर पंचायत ने जमीन नहीं देने का प्रस्ताव पास किया जा चुका है। ऐसे में गांव की पंचायती जमीन की बोली कराई जाएगी। यदि सरकार यहां मेडिकल कॉलेज का निर्माण शुरू नहीं करती तो इससे गांव को काफी नुकसान होगा। इसलिए सशर्त बोली करवाने की योजना है।
- कश्मीरो देवी, सरपंच, हैबतपुर
यह मामला स्वास्थ्य विभाग नहीं, हेल्थ एजुकेशन एंड रिसर्च विभाग देखता है। ऐसे में जिला स्तर पर इसकी अपडेट नहीं होती। यह मामला सीधा निदेशक कार्यालय से जुड़ा होता है। मुझे इसकी जानकारी नहीं है।
- डॉ. संजय दहिया, सिविल सर्जन