प्रदेश सरकार द्वारा गांवों की सरकार के लिए तय की गई शिक्षा की शर्त के बावजूद जींद और सफीदों खंडों के 111 गांवों में से महज 11 गांवों के सरपंच उच्च शिक्षा प्राप्त हैं। 11 सरपंच स्नातक या इससे ऊपर शिक्षित हैं। इनमें से
पांच महिलाएं और छह पुरुष हैं।
जींद खंड के हैबतपुर गांव में कश्मीरो देवी, जाजवान की सविता, झांझखुर्द के सतीश, ललित खेड़ा के वेदपाल और रामराये खेड़ा के सुखविंद्र सिंह स्नातक हैं। वहीं सफीदों खंड में छह उम्मीदवार स्नातक और इससे अधिक शिक्षित हैं। इनमें बरोद की पूनम, भुसलाना के रणबीर सिंह, रामनगर की सरपंच संतोषी, सिंघाना के सुरेंद्र, सिंघपुरा की लक्षमी सैनी और सिवाना माल के सरपंच भूपेंद्र सिंह शामिल हैं।
12वीं पास सरपंच
जिले के दोनों खंडों में कुल 14 सरपंच 12वीं पास बने हैं। इनमें से अमरहेड़ी की सुमन, भैरोखेड़ा के रविंद्र कुमार, बीबीपुर की दीपिका, बिशनपुरा की विनोद कुमारी, बराह खुर्द के रोहताश कुमार, घिमाना की ममता, गोविंदपुरा के सुरेश यादव, खरकरामजी की कविता, राजपुरा के जगबी सिंह, श्रीराग खेड़ा के विरेंद्र कुमार, हरिगढ़ा के जितेंद्र, हाट के विरेंद्र सिंह, जयपुर के सतीश कुमार और टिटोखेड़ी के ओमप्रकाश हैं।
अनुसूचित जाति का नहीं स्नातक सरपंच
दोनों खंडों में बेशक 11 सरपंच स्नातक बने हैं, लेकिन कोई भी अनुसूचित जाति का उम्मीदवार 12वीं से अधिक शिक्षित नहीं है। अनुसूचित जाति के कुल पांच सरपंच 12वीं पास और दस सरपंच दसवीं पास हैं।
पांचवीं पास नहीं आठवीं पास महज 17
नवनिर्वाचित सरपंचों में सर्वाधिक संख्या दसवीं पास की है। दो खंडों में चुने गए कुल 111 सरपंचों में से 40 महिला हैं। दसवीं पास 69 सरपंच चुने गए हैं, जबकि आठवीं पास महज 17 हैं। इनमें से 15 महिला और दो पुरुष हैं। जबकि पांचवीं पास कोई सरपंच नहीं है। नवनिर्वाचित सरपंचों में से 21 अनुसूचित जाति के हैं। जिनमें से नौ अनुसूचित जाति महिला वर्ग से हैं।