जींद। शहर की सड़कों पर घूम रहे तीन हजार से अधिक बेसहारा पशुओं और गली-मोहल्लों में बढ़ते आवारा कुत्तों के आतंक से परेशान लोगों के लिए राहत की उम्मीद जगी है। नगर परिषद जींद ने अब दोनों समस्याओं पर एक साथ कार्रवाई की तैयारी कर ली है।
परिषद ने शहर की सीमा में बेसहारा पशुओं को पकड़ने के लिए खुला टेंडर जारी किया है, वहीं आवारा कुत्तों को पकड़कर उनकी नसबंदी और टीकाकरण करवाने के लिए भी टेंडर जारी किया गया है।
9 सितंबर को 11 बजे तक ऑनलाइन बोली लगेगी। दोनों अभियानों के तहत चयनित एजेंसियां एक साल तक काम करेंगी।
शहर में लंबे समय से आवारा गोवंश सड़कों, बाजारों, चौक-चौराहों और रिहायशी क्षेत्रों में घूम रहा है। शहर की सड़कों पर लगभग तीन हजार से अधिक गोवंश मौजूद है। दिन में जहां इनके झुंड यातायात के लिए परेशानी बनते हैं। रात के समय स्थिति और खतरनाक हो जाती है।
खासकर काले रंग के पशु अंधेरे में वाहन चालकों को दिखाई नहीं देते। ऐसे में अचानक सड़क पर सामने आने वाले पशुओं से बाइक और कार सवारों को दुर्घटना का खतरा बना रहता है। शहर का शायद ही कोई ऐसा क्षेत्र है, जहां दिन या रात में सड़कों पर बेसहारा गोवंश दिखाई न देता हो।
मुख्य मार्गों के साथ बाजारों, कॉलोनियों और गलियों में भी पशुओं के झुंड देखे जा सकते हैं। कई बार पशु सड़क के बीचो-बीच बैठ जाते हैं या अचानक वाहन के सामने आ जाते हैं। इससे वाहन चालकों को ब्रेक लगाने के साथ-साथ बचाव के लिए अचानक दिशा बदलनी पड़ती है।
यातायात के दबाव वाले क्षेत्रों में यह समस्या और गंभीर हो जाती है। आवारा पशुओं को पकड़कर गोशालाओं में भेजेगा नगर परिषद नगर परिषद ने कैप्चरिंग ऑफ स्ट्रे एनिमल्स इन जींद सिटी के तहत आवारा पशुओं को पकड़ने के लिए टेंडर जारी किया है।
टेंडर प्रक्रिया पूरी होने के बाद चयनित एजेंसी को निर्धारित नियमों के अनुसार पशुओं को पकड़ने का जिम्मा दिया जाएगा। इन पशुओं को गोशालाओं में छोड़ा जाएगा। इसके लिए नगर परिषद की ओर से गोशाला संचालकों से बातचीत भी की जा चुकी है।
कुत्तों के झुंड से गलियों से लेकर अस्पताल-स्कूल तक परेशानी
आवारा कुत्तों की समस्या भी शहर में लगातार गंभीर होती जा रही है। शहर की लगभग हर गली, चौक-चौराहे और सार्वजनिक स्थान पर कुत्तों के झुंड दिखाई देते हैं। नागरिक अस्पताल, बस अड्डे और स्कूल-कॉलेजों के बाहर भी बड़ी संख्या में आवारा कुत्ते घूमते रहते हैं। इनके कारण बच्चों, बुजुर्गों और दोपहिया वाहन चालकों में डर बना रहता है। अस्पताल में प्रतिदिन कुत्तों के काटने के 30 से 40 मामले आने की स्थिति ने समस्या की गंभीरता को और उजागर किया है।
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नगर परिषद ने आवारा कुत्तों को पकड़ने, उनकी नसबंदी करवाने और टीकाकरण करने के लिए अलग से टेंडर जारी किया है। 9 सितंबर को ऑनलाइन बोली लगेगी। टेंडर प्रक्रिया पूरी होने के बाद चयनित एजेंसी नगर परिषद की सीमा में 365 दिन तक यह कार्य करेगी। नसबंदी और टीकाकरण के जरिये आवारा कुत्तों की बढ़ती संख्या पर नियंत्रण पाने का प्रयास किया जाएगा। दोनों टेंडर प्रक्रिया पूरी होने के बाद अभियान को निर्धारित नियमों के तहत शुरू किया जाएगा।
-सुशील भुक्कल, ईओ नगर परिषद जींद।