जींद। जिलेभर की अनाज मंडियों में बारिश ने किसानों की मेहनत पर पानी फेर दिया। उठान में देरी के कारण पहले से ही मंडियों में करीब 18 लाख क्विंटल से ज्यादा गेहूं के ढेर लगे हुए थे जो अब बारिश में भीगकर खराब होने की कगार पर पहुंच गए हैं।
नरवाना अनाज मंडी में सबसे ज्यादा नुकसान सामने आया है जहां चारों तरफ भीगे गेहूं की ढेरियां नुकसान की तस्वीर पेश कर रही हैं।
बारिश के दौरान किसानों और आढ़तियों ने गेहूं को बचाने के लिए तिरपाल का सहारा लिया लेकिन यह प्रयास भी नाकाफी साबित हुआ। कई जगहों पर तिरपाल नहीं मिल पाया जिससे रातभर खुले में पड़े गेहूं पर बारिश होती रही।
हालात ऐसे रहे कि बोरियों के नीचे से करीब डेढ़ फीट तक पानी नजर आया। अब भीगे हुए गेहूं को सुखाने में कम से कम 15 से 20 दिन का समय लगेगा। इस दौरान गेहूं के सड़ने का खतरा भी बना हुआ है। इससे किसानों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है।
मंडियों में जगह-जगह भीगे अनाज से उठ रही बदबू और खराब होती गुणवत्ता ने चिंता और बढ़ा दी है। यदि समय रहते गेहूं का उठान तेज कर दिया जाता, तो इस स्थिति से बचा जा सकता था।
नरवाना मंडी में आढ़ती कई दिन पहले ही उठान की धीमी गति को लेकर विरोध जता चुके थे, लेकिन प्रशासन ने इस ओर गंभीरता नहीं दिखाई। जींद अनाज मंडी में भी रात के समय गेहूं को ढकने तक के पर्याप्त इंतजाम नहीं थे।
स्थिति का सीधा असर किसानों की भुगतान प्रक्रिया पर भी पड़ेगा। जब तक गेहूं पूरी तरह सूखकर मंडी से उठान नहीं होगा, तब तक किसानों के खातों में भुगतान जारी नहीं किया जाएगा। ऐसे में किसानों को अब अपनी मेहनत की कमाई के लिए लंबा इंतजार करना पड़ेगा।
वर्जन
प्रशासन के ढीले रवैये के चलते मंडियों में गेहूं की यह बर्बादी किसानों की मेहनत पर मार है। इसके कारण अब किसानों को पेमेंट नहीं मिल पाएगी। प्रशासन बर्बादी का मूकदर्शक बना हुआ है।
-रामराजी ढुल, भाकियू जिला प्रैस प्रवक्ता
04जेएनडी34, 35, 36: नरवाना अनाजमंडी में रात के समय बरसात में भीगते गेहूं। संवाद
04जेएनडी34, 35, 36: नरवाना अनाजमंडी में रात के समय बरसात में भीगते गेहूं। संवाद