सफीदों। श्री एसएस जैन स्थानक में आयोजित धर्मसभा में नवीन चंद्र महाराज एवं श्रीपाल मुनि महाराज ने कहा कि जो पैसा रखे, औरत रखे, मोह रखे वह साधु नहीं है और ना ही उसे गुरु माना जा सकता है। मनुष्य को कभी भी कलेश का कारण नहीं बनना चाहिए। कई बार लोग साधु-साध्वियों को झगड़े का कारण बना देते हैं। यह समाज के ठेकेदार एक तराजू में साधु-साध्वी को तोलते हैं। जबकि समाज को बचाकर रखने की जरूरत है। साधु-साध्वी को अपना जीवन अपने ढंग से जीने दो। समाज की बुराइयों से उनका कोई लेना देना नहीं है। गुरुओं ने उन्हें जो प्यार-प्रेम का तोहफा दिया है, उसमें गोता लगाओ। गुरुओं ने जो बाग लगाया है उसमें कांटे ना बोओ और उससे प्राप्त होने वाले मीठे फलों को खाओ। गुरुओं के लगाए गए बाग को उजाड़ने का प्रयास मत करो।