बेटी बचाने के लिए चलाई गई मुहिम में खाप पंचायत से लेकर सेल्फी विद डॉटर जैसे अभियान चलाने वाले बीबीपुर गांव में सोमवार को एक और कार्यक्रम का आयोजन किया गया।
बेटी बचाने के संदेश के साथ इस बार गांव की बुजुर्ग महिला और पुरुष ठेठ हरियाणवी अंदाज में रैंप पर उतरे और कैट वॉक किया। गांव की महिलाओं ने मॉडलों के अंदाज में कैटवॉक किया।
बीबीपुर गांव में 'रैंप विद बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ डायलॉग प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। इसमें गांव के बुजुर्ग दंपतियों ने भाग लिया। हरियाणी गीतों पर महिलाओं ठेठ हरियाणवी अंदाज में अपने मन के भाव प्रकट किया।
बिजली सी पाटयी धरती धड़क-धड़क हाल्यी, गौरी म्हारे गाम की और छैल्य गैल्या जांगी जैसे गानों पर जम कर धमाल मचाया। कुछ बुजुर्ग अपनी खुशी को छिपा नहीं सके और मंच पर डांस किया।
सभी बुजुर्ग दंपतियों ने बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ अभियान को सफल बनाने के लिए संदेश दिया।
इसके साथ कुछ दंपतियों ने बताया कि वो पिछले पांच साल में बेटियों के प्रति बहुत ज्यादा जागरूक हुए हैं और वो अपनी पौत्रियों को स्कूली शिक्षा दिलाते हैं।
सुकन्या योजना के खाते भी खुलवाएं हैं। सभी प्रतिभागियों ने लाडो को बचाने के लिए जो संदेश दिये हैं वो बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ को जन जागरण बना सकते हैं।
केला देवी ने जीता प्रथम पुरस्कार
प्रतियोगिता के दौरान प्रथम पुरस्कार केला देवी व महेंद्र को 3100 रुपये द्वितीय पुरस्कार ओमपति व उनके पति जयभगवान को 2100 रुपये व तृतीय पुरस्कार कृष्णा व उनके पति सतबीर को 1100 व 100 प्रतिभागियों को कंबल व शॉल वितरति किए गए।
प्रधानमंत्री ने सराही थी मुहिम
इससे पहले बीबीपुर गांव के निवर्तमान सरपंच सुनील जागलान ने सेल्फी विद डॉटर मुहिम चलाई थी। विदेशों तक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस अभियान की तारीफ कर रहे हैं।
महिलाओं ने किया खास श्रृंगार
कैटवॉक के दौरान जहां पुरुषों ने डोगा, पगड़ी, हरियाणवी जुती जैसे परिधान पहने वहीं महिलाओं ने भी खास श्रृंगार किया। रैंप पर लाल व काले दामण से लेकर पुराने जमाने की चुंदड़ी तक प्रयोग की गई। महिलाओं ने श्रृंगार के लिए कंठी, पतरी, हार, ढोल व बोरला जैसे जेवर पहने।
महिला सशक्तिरण की ओर एक कदम
कार्यक्रम के आयोजक और गांव के निवर्तमान सरपंच सुनील जागलान के अनुसार इस प्रकार के कार्यक्रम महिलाओं के सशक्तिकरण की ओर एक कदम है। इससे जहां महिलाओं को अपनी अभिव्यक्ति का मंच मिलता है, वहीं इस प्रकार के कार्यक्रमों का संदेश भी व्यापक स्तर तक जाता है। उम्मीद है इस कार्यक्रम से बेटी बचाने का संदेश जाएगा।