राजकीय कन्या कालेज की चार दीवारी के लिए कब्जा छुड़ाने गए प्रशासनिक अधिकारी व प्लाट धारक आमने-सामने हो गए। प्लाट धारकों ने प्रशासन पर उनकी जमीन छीनने का आरोप लगाया है।
सोमवार को सफीदों प्रशासन की टीम पुलिस टीम को साथ लेकर राजकीय कन्या स्कूल में चार दिवारी की नींव खुदवाने के लिए पहुंची। इस मौके पर तहसीलदार रोशन लाल, नायब तहसीलदार देव सिंह सैनी, एसएसओ सज्जन कुमार, एसआई पवन कुमार टीम के साथ पीडब्ल्यूडी विभाग के एसडीओ व कुछ अन्य प्रशासनिक अधिकारी भी मौजूद रहे।
कार्रवाई के दौरान 16 प्लाट धारकों ने विरोध किया कि सरकार व सफीदों प्रशासन उनकी जमीन को छीन रहा है। मौके पर मौजूद स्थानीय तहसीलदार रोशन लाल से प्लाट धारक रामप्रसाद, शमशेर, राम लाल, श्याम लाल, कृष्ण, अर्जुन, मोहन लाल, हरि राम, जय भगवान सहित कई का कहना था कि आज से 30 साल पहले पंचायती तौर पर नुरसर तालाब के पास 216 प्लाट काटे गए थे।
इसके लिए उन्होंने व्यापारियों से ब्याज पर रुपये लाकर एक-एक हजार रुपये पंचायतियों को दिए थे लेकिन प्रशासन ने उनमें से 16 प्लाटों को राजकीय कन्या कालेज के प्रांगण में शामिल कर लिया है।
उन्होंने कहा कि पूर्व राज्यपाल जब कालेज की नींव रखने आए थे तो उन्होंने आश्वासन दिया था कि उनके प्लाटों को कालेज प्रांगण में शामिल नहीं किया जाएगा। जिनके आश्वासन पर जिला प्रशासन ने भी उनके प्लांटों को बचाने की बात कहीं थी। उनके पास रजिस्ट्ररी इसलिए नहीं है, क्योंकि जमीन लाल डोरे में है।
उन्हें नहीं पता था कि एक दिन सफीदों प्रशासन व सरकार मिलकर उनके प्लाटों को छीनने का काम करेगी। इस दौरान प्लाट धारकों ने प्रशासनिक अधिकारियों से अपने कुछ दस्तावेज भी दिखाए लेकिन तहसीलदार रोशन लाल ने सभी प्लाट धारकों को एसडीएम से मिलने की बात कही।
बिना नोटिस कार्रवाई करने पहुंचा प्रशासन
मोहन लाल ने बताया कि प्रशासन द्वारा आज की कार्रवाई के लिए उन्हें कोई नोटिस नहीं दिया गया। जब कार्रवाई के दौरान नोटिस की बात सामने आई तो प्रशासन ने नींव खोदने के बाद प्लांट धारकों के उपलों का बिना कब्जा हटवाए वापस लौटना पड़ा।
वार्ड के नगर पार्षद रामेश्वर सैनी ने कहा कि पंचायती तौर पर यह प्लाट काटे गए थे। इनमें प्लाट मालिकों द्वारा नीवं भी भरी गई है। साथ ही यहां पर इनके पूर्वजों के थान भी बने हुए हैं। प्लाट धारकों का कसूर सिर्फ इतना है कि इन्होंने इस जगह पर अपने मकान नहीं बनाए हैं। प्रशासन को इनके प्लाटों को छोड़ना चाहिए अगर ऐसा नहीं हुआ तो वे अदालत का दरवाजा खटखटाएंगे।