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Jind News: आज पितरों के स्मरण और दान का अवसर

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उचाना। शुक्रवार को भाद्रपद मास की अमावस्या मनाई जाएगी। सनातन परंपरा में अमावस्या को आत्मशुद्धि, पितरों के स्मरण, तर्पण, स्नान और दान-पुण्य के लिए विशेष माना गया है। इस दिन मन में शांति और परिवार में मंगल की भावना बढ़ती है।
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प्राचीन राधा-कृष्ण मंदिर उचाना मंडी पुजारी भारतेंदु शास्त्री ने बताया कि अमावस्या 11 सितंबर को सुबह करीब आठ बजकर 57 मिनट पर समाप्त होगी। उदया तिथि के अनुसार 11 सितंबर को स्नान-दान किया जाएगा। अमावस्या के दिन प्रात: स्नान कर सूर्यदेव को अर्घ्य देना शुभ माना जाता है।
संभव हो तो पवित्र नदी, सरोवर या तीर्थ में स्नान करना चाहिए। उन्होंने बताया कि अमावस्या पितरों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का महत्वपूर्ण अवसर है। श्रद्धानुसार जल में काले तिल और कुश मिलाकर पितरों का स्मरण करते हुए तर्पण किया जा सकता है। दक्षिण दिशा की ओर मुख करके तर्पण करने की परंपरा भी प्रचलित है।
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परिवार की पितृकर्म संबंधी परंपराओं का पालन कुलाचार और स्थानीय पंचांग के अनुसार करना उचित है। इस दिन सामर्थ्य के अनुसार अन्न, वस्त्र, तिल, फल एवं जरूरत की वस्तुओं का दान करना पुण्यदायी माना गया है। जरूरतमंद को भोजन करवाना भी सेवा है। संवाद
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