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धर्मांधता नहीं, मानव की रक्षा ही परम धर्म : अहिरका

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जींद। असमर्थ महिला कल्याण ट्रस्ट के संस्थापक पंडित राम निवास अहिरका ने नरवाना रोड पर गायत्री यज्ञ के बाद मानव धर्म और सामाजिक जिम्मेदारी पर वीरवार को अपने विचार व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि मुसीबत में फंसे प्राणी ही नहीं, बल्कि हर मानव की रक्षा करना मानव का परम धर्म है। आज अति स्वार्थ के कारण लोगों की सोच में बदलाव आया है और कई लोग मुसीबत में फंसे व्यक्ति की मदद करने के बजाय इस बात पर विचार करने लगते हैं कि वे स्वयं उस झगड़े या परेशानी से कैसे बचें। उन्होंने इसे मानवता के लिए बड़ी धर्मांधता बताया। उन्होंने रावण और लक्ष्मण के प्रसंग का उदाहरण देते हुए कहा कि रावण ने लक्ष्मण से अपने सामर्थ्य और स्वर्ण लंका का उल्लेख करते हुए पूछा था कि आखिर किस शक्ति के बल पर उसका और उसके पूरे कुल का नाश हुआ। इस अवसर पर सूरजमल श्योकंद, रामकुमार नैन, तेलूराम शर्मा, एडवोकेट गगनदीप बैरागी, वेदपाल डाहोला, पीसी जैन और जोगिंद्र सिंह पाहवा मौजूद रहे।
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