सरकार द्वारा प्रदेश सरकार सरकारी स्कूलों में सुविधाएं देने का दावा नरवाना उपमंडल के गांव बेलरखां के राजकीय मॉडल संस्कृति वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय को देखकर दम तोड़ता नजर आता है। विद्यालय कहने को तो मॉडल संस्कृति स्कूल है, लेकिन यहां सुविधा के नाम पर कुछ नहीं है। न तो पूरे शिक्षक हैं, न ही क्लास रूम। ऐसे में सर्दी के मौसम में भी विद्यार्थियों को खुले आसमान के नीचे ही कक्षाएं लगानी पड़ेंगी। बेलरखां गांव में जिला का एकमात्र मॉडल संस्कृति स्कूल है। स्कूल में न तो स्टाफ पूरा है और न ही बच्चों के लिए कमरे। कमरों की कमी होने के कारण बच्चे सर्दी के मौसम में खुले में पढ़ने को मजबूर हैं। आधी से ज्यादा कक्षाएं खुले में लग रही हैं। जबकि कई कक्षाएं बरामदे और फिजिक्स लैब व म्यूजियम रूम में रखे सामान के बीच लग रही हैं। गौरतलब है कि बेलरखां गांव में स्थित राजकीय स्कूल का निर्माण 1955 से भी पहले किया गया, 2007 में सरकार ने इस स्कूल को अंग्रेजी माध्यम बनाकर मॉडल स्कूल का दर्जा दिया। फिलहाल यहां पहली कक्षा से बारहवीं कक्षा तक विद्यार्थी पढ़ने आते हैं। स्कूल में 610 विद्यार्थी हैं और कुल 19 कक्षाएं हैं। पिछले दिनों विभाग ने 17 कमरों को कंडम घोषित कर दिया, जिससे अब स्कूल के पास महज सात कमरे ही बचे हैं। ऐसे में आने वाले सर्दी के मौसम में यहां के विद्यार्थियों के समक्ष कक्षाएं लगाने का संकट आ खड़ा हुआ है। हालांकि शिक्षक भी तमाम असुविधाओं को स्वीकार कर रहे हैं, लेकिन सरकारी व्यवस्था के आगे हर कोई मजबूर है।
जिले का एकमात्र स्कूल
बेलरखां का राजकीय मॉडल संस्कृति वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय जिले का एक मात्र मॉडल स्कूल है। जो धीरे-धीरे अब अपनी पहचान खो रहा है। सरकार ने जींद जिले के अंदर गांव बेलरखां में राजकीय मॉडल संस्कृति वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय शुरू तो किया लेकिन स्टाफ व कमरों के बिना बच्चों के सपने टूट रहे हैं। स्कूल में गांव के साथ-साथ आस-पास के गांवों के भी बच्चे शिक्षा के लिए आते हैं। लेकिन कमरों की कमी के कारण अब बच्चों की संख्या पर भी असर पड़ने लगा है।
अध्यापकों की कमी
स्टाफ सदस्यों के अनुसार शिक्षा विभाग ने मॉडल स्कूल का दर्जा तो दे दिया लेकिन स्कूल में अध्यापक की संख्या काफी कम है। विद्यालय में 39 अध्यापकों के पद स्वीकृत हैं, इसमें से 12 पद खाली हैं। एक पोस्ट स्वीपर कम चौकीदार की है जो पिछले कई माह से ड्यूटी पर नहीं आ रहा है।
ठंड में नहीं होती पढ़ाई
चौथी कक्षा की छात्रा रिशु ने कहा कि स्कूल में कमरों की कमी है। जिसके कारण उन्हें बाहर बैठना पड़ता है। छात्रा ने कहा कि ठंड में अच्छी तरह से पढ़ाई नहीं होती।
कमरे बनाए जाएं
पांचवीं कक्षा के छात्र नितिन ने कहा कि स्कूल में कमरे बनाए जाए ताकि अच्छी तरह से पढ़ाई हो सके। छात्र ने कहा कि कमरों की कमी होने के कारण बरामदों में बैठकर पढ़ना पड़ता है।
बीमार होने का डर
चौथी कक्षा की छात्रा अंकिता ने कहा कि खुले में बैठने के कारण सर्दी लगती है। जिससे बीमार होने का भी डर बना रहता है। छात्रा ने कहा कि धुंध होने के कारण कपडे़ व किताबें गिली हो जाती है।
कब बनेंगे नए कमरे जानकारी नहीं
उच्च अधिकारियों के आदेश पर पुरानी बिल्डिंग को कंडम घोषित किया गया है। नए कमरेे बनाने बारे उन्हें जानकारी नहीं।
- जगदीश चंद्र, खंड शिक्षा अधिकारी
कुछ समय पहले पहले मैंने स्वयं स्कूल का दौरा किया था, यहां एक भवन पूरी तरह जर्जर है। इस पर निशान लगवाकर कक्षाओं के लिए बंद करवा दिया है। इसका प्रस्ताव सरकार को भेजा गया है। वहां से स्वीकृति मिलते ही भवन का निर्माण करवा दिया जाएगा।
- वंदना गुप्ता, जिला शिक्षा अधिकारी।