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500-1000 रुपये के नोट बंद होने से बाजार में हाहाकार

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इंदिरा बाजार में 500 रुपये का नोट लेने से मना करते एक व्यापारी। - फोटो : bureau
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केंद्र सरकार द्वारा 500 और 1000 रुपये के नोट बंद करने का व्यापक असर बुधवार को मार्केट में देखने को मिला। सब्जी के ठेले से लेकर ज्वैलर्स और इलेक्ट्रानिक्स शोरूमों में खरीददारी ठप रही। मुख्य कारण एक हजार और पांच सौ रुपये से सामान लेने के बाद खुले पैसे नहीं होने का रहा। बुधवार को जींद की मार्केट में सोने की कोई बुकिंग नहीं हुई। इतना ही नहीं सैकड़ों बुक आर्डर भी लोग लेने नहीं पहुंचे। सबसे अधिक असर करियाणा बाजार में दिखा, जहां लोग शादियों के लिए सामान लेने पहुंचे थे। यहां व्यापारी एक हजार और पांच सौ रुपये के नोट लेने से इंकार कर रहे हैं और उधार में सामान देना पसंद कर रहे हैं। वहीं कुछ लोगों ने चेक से भुगतान कर सामान लिया। खुले पैसे नहीं होने के कारण रोडवेज में भी अव्यवस्था रही। एक हजार और पांच सौ के नोटों पर रात को ही सरकार का फैसला आया था। बुधवार को सुबह होते ही इसका व्यापक असर दिखने लगा। बाजार में हालांकि अधिकतर व्यापारी पांच सौ और एक हजार रुपये का नोट ले रहे थे, लेकिन इसके बदले खुले पैसे नहीं मिले। उपभोक्ता यदि खुले पैसे देता है तो कहीं कोई दिक्कत नहीं हुई। सब्जी मंडी में आढ़तियों और मांसाखोरों को बड़ी परेशानी झेलनी पड़ी। हालांकि मांसाखोरों को तो उधार में सब्जी मिल गई, लेकिन उन्होंने बड़े नोटों के बदले सब्जी नहीं बेची। वहीं बैंक कर्मचारी भी बृहस्पतिवार से बैंक खोलने की तैयारी में लगे रहे।
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200 करोड़ का कारोबार अटका
जिले में प्रतिदिन करीब 200 रुपये का लेन-देन बैंकों से होता है। सभी एटीएम और बैंक बंद होने के कारण यह कारोबार बाधित रहा। हालांकि लोग पैसे लेने के लिए बैंक और एटीएम पहुंचे, लेकिन यहां से निराश ही वापस लौटे। वहीं करेंसी के कारण जिले में करीब 90 लाख से एक करोड़ रुपये तक का करियाणा बाजार प्रभावित हुआ। शादियों के सीजन के कारण ज्वैलर्स के अनुसार जिला भर में एक दिन में 15 करोड़ रुपये से अधिक का कारोबार होता है, जो पूरी तरह बंद रहा। ज्वैलर्स ने बताया कि अधिकतम दस प्रतिशत काम ही बुधवार को हो पाया है। वहीं जिला भर के 177 पेट्रोल पंपों पर प्रतिदिन 35 हजार लीटर पेट्रोल और करीब डेढ़ लाख लीटर डीजल की बिक्री होती है। इसमें कोई कमी नहीं आई है। शादियों के सीजन के कारण कपड़ा मार्केट में भी काम प्रभावित रहा, लेकिन यहां स्थायी उपभोक्ता होने के कारण करीब 50 से 70 प्रतिशत कारोबार उधार में हुआ है।

नहीं मिला सोना
शादियों के सीजन में नई व्यवस्था का सबसे बुरा असर ज्वैलर्स पर पड़ा है। बुधवार को ज्वैलर्स को भी दिल्ली की मार्केट से सोना बुक नहीं हुआ। ऐसे में उनके यहां आने वाले उपभोक्ताओं के आर्डर भी नहीं लिए गए। ज्वैलर्स सोनू भोला के अनुसार बुधवार को 200 ग्राम सोने का आर्डर बुक करवाना था, लेकिन नहीं हो सका।
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बाजार में भीड़ दुकानें सुनसान
500 व एक हजार रुपये के नोटों के बंद होने का असर बाजार पर पूरा दिखा। हालांकि बाजार में लोग खरीदारी के लिए पहुंचे, लेकिन दुकानदारों द्वारा बड़े नोट लेने से मना करने पर काफी परेशान हुए।

हजार और पांच सौ का बिका सामान
मेन बाजार में कपड़े का कारोबार करने वाले विनय सिंगला के अनुसार शादियों के सीजन में सरकार के फैसले से काफी प्रभाव पड़ रहा है। हालांकि विनय सिंगला कपड़ा बेच रहा है, लेकिन 500 के गुणात्मक नोटों से ही। यदि यदि 100 के गुणात्मक नोटों का बिल बनता है तो उपभोक्ताओं को ही ये नोट देनें होंगे। सिंगला के अनुसार इसके चलते दस में से एक ही ग्राहक सामान खरीद पा रहा है। नौ ग्राहक वापस लौट रहे हैं।

कार्ड पेमेंट से चले काम
मार्केट में बड़े नोट नहीं चलने के कारण लोगों को अधिकतर लोगों ने क्रेडिट कार्ड व डेबिट कार्ड से ही खरीददारी की। इसके लिए ईजीडे और ब्रांडेड कंपनियों के शोरूम पर ग्राहकों की संख्या अधिक रही। वहीं मार्केट में कार्ड से पेमेंट की सुविधा नाम मात्र की है। 300 से अधिक ज्वैलर्स की दुकान में से महज आधा दर्जन के पास ही कार्ड स्वैप किए जाते हैं। इसी प्रकार करियाणा बाजार में कार्ड स्वेपिंग की सुविधा नहीं है। सब्जी के लिए कोई बड़ा रिटेल स्टोर नहीं होने के कारण लोगों को छोटे नोटों से ही खरीददारी करनी पड़ी।

दिन भर हर जगह एक ही चर्चा
जिला भर में दिन भर चर्चा का एक ही मुद्दा रहा, वह करेंसी में बदलाव। हालांकि लोग परेशान हैं, लेकिन अधिकतर लोग सरकार के इस फैसले के समर्थन में दिखे। हां कुछ व्यापारियों को दिक्कत है। इंदिरा बाजार के एक करियाणा व्यापारी के अनुसार एक दिन में अधिकतम चार हजार रुपये बदलवाने की छूट है। बैंक खुलते ही लंबी लाइन लगेगी। इससे एक आदमी इसी काम में उलझ जाएगा।

पांच सौ रुपये के नोट से नहीं मिला गुड़
कंडेला गांव के बुजुर्ग बुधवार को गुड़ लेने के लिए इंदिरा बाजार पहुंचे। इन बुजुर्गों के गुड़ का रेट भी तय कर लिया, लेकिन जैसे ही पांच रुपये का नोट दिखाया, दुकानदार ने हाथ जोड़कर सामान देने में असमर्थता जताई। जब बुजुर्गों ने कहा कि उन्हें हुक्के के तंबाकू के लिए गुड़ लेना है तो व्यापारी ने कहा कि वह उनको मुफ्त में ही कुछ गुड़ दे सकता है।

रोडवेज की बस में खुले पैसे के लिए मारामारी
छोटे नोटों की सबसे अधिक कमी रोडवेज में सफर करने वाले यात्रियों और कंडक्टरों को खली। यहां लोग टिकट के लिए पांच सौ और एक हजार रुपये के ही नोट दे रहे थे। इस को लेकर कई यात्रियों और रोडवेज कर्मचारियों के बीच कहासुनी भी हुई। वहीं रोडवेज कर्मचारी यूनियन के जिला प्रधान अजीत नहरा के अनुसार यदि यही स्थिति रही तो बस बंद करनी पड़ेंगी। इस पर रोडवेज महाप्रबंधक आरएस पूनिया के कहा कि प्रतिदिन आने वाले कैश से 100 व 50 रुपये के नोट रखे गए हैं। एडीसी आमना तस्नीम ने भी कहा कि यदि रोडवेज को अधिक दिक्कत आती है तो बैंक से नोट जारी करवाए जाएंगे।
 
पेट्रोल पंप पर लगी रही भीड़ खुले देने पर ही मिला पेट्रोल
पेट्रोल पंप से डीजल और पेट्रोल लेने वालों को खुले पैसे की दिक्कत आई। यदि उपभोक्ता ने खुले पैसे दिए तो उसको उतने ही पैसे का पेट्रोल मिल भी गया। वैसे लोगों को सबसे अधिक दिक्कत पेट्रोल पंपों पर ही आई। वहीं पेट्रोल पंप डीलर्स एसोसिएशन के प्रधान रघुबीर भारद्वाज के अनुसार भी पंपों को 500 व एक हजार रुपये के नोट स्वीकार करने के निर्देश दिए गए हैं। कहीं भी नोट लेने से मना नहीं कर रहे हैं।

 
नहीं भरे गए बिजली के बिल, बीज भी नहीं मिला
जुलाना। 500 और 100 रुपये के नोट नहीं चलने से लोगों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा। लोगों को पेट्रोल पंप से भी खुले पैसे नहीं मिले वहां पर भी किसानों को बिना तेल के ही लौटना पड़ा। बिजली निगम के कार्यालय से भी लोगों को बिना बिल भरे ही लौटना पड़ा। इससे लोगों में रोष बना हुआ है। उपभोक्ताओं का कहना है कि बिल भरने की अंतिम तिथि के दिन भी उन्हें बिना बिल भरे ही लौटना पड़ा। क्योंकि विभाग के कर्मचारियों ने 500 और 1000 के नोट लेने से मना कर दिया। बिजली कर्मचारियों का कहना है कि अगर कोई बिल का भुगतान चैक द्वारा करना चाहे तो कर सकता है अन्यथा उच्च अधिकारियों ने पुराने नोट लेने से मना कर दिया है। इसी से परेशान होकर उपभोक्ताओं ने बिजली विभाग के कर्मचारियों के खिलाफ रोष प्रकट किया। उपभोक्ताओं को आश्वासन देते हुए कहा कि जिन उपभोक्ताओं के बिल की अंतिम तिथि है उसे तिथि को आगे बढ़ाया जाएगा। वहीं दूसरी ओर बीज लेने आए किसानों को भी विभाग के अधिकारियों द्वारा 500 व 100 रुपये नोट नहीं लेने पर बिना बीज लिए ही बैरंग घर लौटने पर मजबूर होना पड़ा। किसानों ने रोष प्रकट करते हुए कहा कि वो घर से बीज लेने के लिए आए थे। लेकिन बीज की सरकारी दुकान के कर्मचारियों ने पांच सौ और हजार के नोट बंद होने के कारण उन्हें बीज नही मिला जिससे उन्हें काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा। इससे तंग होकर किसानों ने प्रशासन और सरकार के खिलाफ रोष प्रकट कर जमकर नारेबाजी की।

बाजार में सन्नाटा, लोगों के काम आई बच्चों की गुलक

नरवाना। मोदी सरकार द्वारा अचानक पांच सौ और एक हजार के नोट बंद करने से लोग काफी परेशान हैं हालांकि चौतरफा लोगों ने मोदी के इस फैसले की सराहना की है। भारी संख्या में लोग बड़े नोट होने के कारण बाजार में नहीं आए जिससे बाजारों में रौनक कम रही। काफी दुकानदारों ने बड़े नोट लेने से साफ इंकार कर दिया। ग्राहक सामान देखने से पहले बड़े नोट देने की बात कर रहा था। पेट्रोल पंपों, बसों और रेलवे स्टेशन पर अफरा तफरी का माहौल रहा। प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने संबोधन में सरकारी अस्पतालों, पेट्रोल पंपों, बसों और रेलवे टिकट के लिए नोटों के प्रचलन की बात कही थी लेकिन हर कोई वापसी के लिए नोट नहीं होने का हवाला दे रहे थे। रोजमर्रा की वस्तु खरीदने के लिए लोगों को अपनी बच्चों की गुलक याद आई। सुबह जब लोगों ने देखा कि  उनके पास छोटे नोट नहीं है। तो बच्चों की गुलक खोलकर दूध, सब्जी सहित रोजमर्रा की वस्तुएं खरीद कर काम चलाया।

सोशल मीडिया पर भी चर्चा का विषय रही पुराने नोटों की विदाई
सरकार द्वारा पांच सौ और एक हजार के नोट बंद करने को दिन भर सोशल मीडिया में चर्चा का विषय बना रहा। दिन भर नोटों के बंद होने को लेकर अलग-अलग प्रकार के संदेश आते रहे। इसमे कोई नोट को पत्ता बनाकर नमकीन डाल रहा है तो कोई इन पर माला चढ़ाकर अंतिम विदाई दे रहा है।

देव उठनी एकादशी पर शादियों की धूम, लोग परेशान
लोगों को सबसे अधिक दिक्कत शुक्रवार को देव उठनी एकादशी को होने वाली शादियों के कारण हो रही है। करेंसी की दिक्कत आ रही है। बाजार की जरूरतों के अलावा शादियों में अन्य खर्च के लिए भी पैसे की दिक्कत आ रही है।

प्रशासन अलर्ट, आज बैंकों में रहेगी अतिरिक्त सुरक्षा
करेंसी बदलने के बाद पहली बार बृहस्पतिवार को खुल रहे बैंकों की सुरक्षा को लेकर प्रशासन ने खास तैयार की है। एडीसी आमना तस्नीम और एसपी आरके मीणा ने बताया कि प्रशासन इसके लिए तैयार है। एडीसी ने कहा कि जिस व्यक्ति के पास एक हजार तथा 500 रुपये के नोट हैं वे आगामी 31 दिसंबर तक बैंकों के माध्यम से अपने खातों में डलवा सकते हैं। पत्रकार वार्ता में एडीसी ने कहा कि उन्होंने कहा कि लोग नोट बंद होने से कतई नहीं घबराएं। जिस व्यक्ति के पास फिलहाल पांच सौ तथा एक हजार रुपये के नोट उपलब्ध हैं वे इन नोटों को बैंकों के माध्यम से अपने खातों में जमा करवा सकते हैं। सरकार द्वारा यह भी निर्णय लिया गया है कि व्यक्ति बैंक एवं डाकघर के माध्यम से पुराने नोट जमा करवाकर अधिकतम चार हजार रुपये की राशि के नोट प्रतिदिन बदलवा सकता हैं। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि जो व्यक्ति आगामी 31 दिसंबर तक पुराने नोटों को अपने खातों में जमा नहीं करवा पाया वह शपथपत्र देकर 31 मार्च 2017 तक इन नोटों को जमा करवा सकता हैं।

आज खुलेंगे बैंक, कल से एटीएम भी
एडीसी ने कहा कि 10 नवंबर से बैंक खुल जाएंगे और 11 नवंबर को एटीएम भी काम करना शुरू कर देंगे। एटीएम के माध्यम से व्यक्ति प्रतिदिन दो हजार रुपये की राशि निकलवा सकते हैं। एनईएफटी तथा चैक  के माध्यम से अधिक राशि भी निकलवाई जा सकती हैं। इन संस्थानों में एवं सेवाओं के लिए पुराने एक हजार एवं 500 रुपये के नोट भी चलेंगे। उन्होंने इस दौरान अधिकारियों की भी आदेश दिए कि वे किसी भी प्रकार अराजकता नहीं फैलने दें।

आज पहुंच सकती है नई करेंसी
नई करेंसी आने से पहले दिन भर बैंक कर्मचारी तैयारियों में लगे रहे। इसके लिए सॉफ्टवेयर अपडेट भी किया गया है। बैंकों में नई करेंसी पहुंच रही है। बृहस्पतिवार को नई करेंसी पहुंचे की उम्मीद है। शुक्रवार से यह मिलनी शुरू हो जाएगी।
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- बीएम पंवार, चीफ मैनेजर, पीएनबी

 
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