बिजली निगम व सिंचाई विभाग में चल रही खींचतान का खामियाजा आठ गांवों के किसानों को भुगतना पड़ रहा है। बिजली न मिलने से धान की सिंर्चा नहीं हो पा रही है जिससे धान सूख रहा है। सिंचाई विभाग बिजली निगम को नहर के किनारे लाइन नहीं खींचने दे रहा है। सफीदों उपमंडल के गांव सिल्लाखेड़ी, रत्ताखेड़ा, जयपूर, छाप्पर, सिंघाना, बुढ़ाखेडा, बहादुरगढ़ सहित कई गांवों के किसानों को ओवरलोड के कारण शेडयूल के अनुसार बिजली नहीं मिल पा रही है। इस समस्या को देखते हुए बिजली निगम ने सिल्लाखेड़ी के 11 केवी एम फीडर के साथ गांव जयपुर में अलग से एक 11 केवी का नया फीडर लगाने का प्रोजेक्ट तैयार किया है। इस कार्य के निर्माण के लिए निगम के द्वारा करीब 21 लाख 22 हजार रुपये का पिछले साल बजट पास करवाया गया। इसमें निगम द्वारा 75 पोल नए खड़े किए जाने हैं। बीते एक साल से पोल खड़े करने का काम जारी है और यह काम अंतिम पड़ाव में था। निगम द्वारा बनाई गई कार्य योजना के अनुसार इस बिजली लाइन को ले जाने के लिए कुछ पोल नहरी विभाग की जमीन में खड़े किए जाने हैं। एक माह पहले सिंचाई विभाग को जैसे ही उनकी जमीन में पोल लगाने की सूचना मिली, नहरी विभाग अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर काम रुकवा दिया।
दोनों विभागों का तर्क
सिंचाई विभाग के अनुसार पोल लगाने के लिए बिजली निगम ने पोल खड़े करने के लिए विभाग से अनुमति नहीं ली है। इसलिए काम रुकवा दिया गया है। वहीं बिजली निगम के एसडीओ होशियार सिंह के अनुसार सिंचाई विभाग से पोल खड़े करने के लिए मौखिक तौर पर जानकारी ली गई है। चाहे मामला कुछ भी हो, दो विभागों की खींचतान का खामियाजा किसानों को भुगतना पड़ रहा है। पिछले एक साल से चल रही ओवरलोड की समस्या जस की तस है।
एसडीएम दरबार में भी नहीं निकला हल
दोनों विभागों के आमने-सामने होने का मामला मंगलवार को एक महीना पहले एसडीएम दरबार में भी पहुंच चुका है। पिछले एक माह में एसडीएम भी मामले का कोई निष्कर्ष नहीं निकाल पाए हैं, जिससे बिजली निगम का कार्य अधर में ही लटका पड़ा है। इस मामले को जहां एक ओर सफीदों के एसडीएम बलराज जाखड़ अपने स्तर पर निपटाने का बात कह रहे हैं, वहीं नहरी विभाग इस मामले में सख्त रवैया अपनाए हैं। अब देखना यह होगा कि बिजली निगम नहर के साथ लगते खड़े किए गए खंभों पर तार लगाकर इस कार्य को अमलीजामा पहनाने का काम करता है या उन पोलों को उखाड़ने पर मजबूर होता है।
बिजली निगम का कार्य पिछले एक महीने से रुका हुआ है। अगर कार्य पूरा नहीं हुआ, तो किसानों को बिजली के लिए परेशान होना पड़ेगा, क्योंकि पहले लाइन पेड़ों के बीच से गुजरी हुई थी। इस कारण तेज हवा व तूफान में अक्सर लाइन टूट जाती है। इसलिए बिजली निगम ने गांव रत्ताखेड़ा, सिल्लाखेड़ी, बहादुरगढ़, छाप्पर, जयपुर, सिंघाना व बुढ़ाखेडा के खेतों में किसानों की समस्या को दूर करने के लिए एक बजट बनाया गया था।
- होशियार सिंह, एसडीओ
बिजली निगम
लिखित में लेनी चाहिए थी अनुमति
नहरी विभाग के एक्सईएन अनिल संभरवाल ने कहा कि बिजली निगम द्वारा नहरी विभाग की जमीन में बिना किसी अनुमति के पोल खड़े करने का कार्य किया है, जोकि सरासर गलत है। इसके लिए बिजली निगम के अधिकारियों ने लिखित में अनुमति लेनी चाहिए थी।