जींद। कोरोना महामारी के दौरान फिलहाल सरकार की तरफ से नागरिक अस्पतालों में कोई भी ओपीडी बंद नहीं की गई है। इसके बावजूद अस्पताल में प्रतिदिन 100 के आसपास लोग ही ओपीडी में दिखाने के लिए आ रहे हैं। लगभग सभी चिकित्सकों की ड्यूटी कोविड वार्डों में लगी हुई है। इसके बावजूद भी चिकित्सक मरीजों को देख रहे हैं। इस समय अस्पताल में केवल कोरोना से संबंधित मरीज ही आ रहे हैं।
पिछले वर्ष 25 मार्च को जिले में लॉकडाउन लग गया था। संक्रमण को देखते हुए पिछले वर्ष सरकार ने सभी प्रकार की ओपीडी को बंद कर दिया था। केवल इमरजेंसी में ही मरीज को देखा जा सकता था। नवंबर के बाद धीरे-धीरे ओपीडी खुल गई और अस्पताल में अन्य बीमारियों से संबंधित मरीज आने शुरू हो गए। इस वर्ष मार्च महीने तक नागरिक अस्पताल में काफी संख्या में मरीज आने लगे। मार्च तक प्रतिदिन औसतन नागरिक अस्पताल में 1300 के आसपास मरीज आते थे। मई महीने में फिर से लॉकडाउन लग गया। इस बार सरकार ने कोई भी ओपीडी बंद नहीं की, केवल अस्पताल में ओपीडी का समय सुबह नौ बजे से दोपहर 12 बजे तक कर दिया गया। लॉकडाउन को देखते हुए अस्पताल में मरीज आने बंद हो गए। अस्पताल में केवल कोरोना से ही संबंधित मरीज आते रहे। फिलहाल नागरिक अस्पताल में डिप्टी एमएस डॉ. राजेश भोला, डॉ. तंवर, डॉ. सतीश सुलेख, डॉ. संकल्प व गाइनी में ओपीडी जारी है। सर्जन डॉ. चंद्रमोहन, डॉ. गोपाल गोयल तथा फिजिशियन डॉ. नरेश वर्मा मरीज को कोरोना वार्ड से समय निकालकर अन्य बीमारियों के मरीज देखते हैं। हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉ. संतलाल फिलहाल कोरोना पॉजिटिव आ चुके हैं। अब उनके स्थान पर डॉ. संदीप मरीजों को देख रहे हैं। दंत विभाग में भी फिलहाल ओपीडी हो रही हैं। कुल मिलकर अस्पताल में लगभग सभी चिकित्सक आम दिनों की तरह मरीजों देखते हैं।
नागरिक अस्पताल में कोई भी ओपीडी बंद नहीं की गई है। कुछ चिकित्सक लगातार ओपीडी में बैठते हैं तथा कुछ चिकित्सक कोविड वार्ड से समय निकालकर मरीजों को देखते हैं। अस्पताल में रूटीन के ऑपरेशन बंद किए गए हैं। जरूरी ऑपरेशनों को फिलहाल भी जारी रखा गया है। यदि किसी मरीज को चिकित्सक को दिखाना हो तो वह अस्पताल में आ सकता है।
-डॉ. बिमला राठी, पीएमओ।