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‘महनोहर’ घोषणाओं पर नहीं हो रहा अमल

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कच्चा पड़ा जींद का बाईपास। - फोटो : bureau
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मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर दो साल में पांचवीं बार जींद आ रहे हैं, लेकिन जींद की जनता को अब भी विकास का इंतजार है। दो साल पहले 26 दिसंबर में सीएम मनोहर लाल द्वारा की गई किसी भी घोषणा पर अभी तक काम शुरू नहीं हो सका है। हालांकि मेडिकल कॉलेज की साइट को अंतिम रूप दिया जा चुका है, लेकिन मुख्यमंत्री की महत्वाकांक्षी परियोजना जींद के सरकारी पालिटेक्निक कॉलेज की साइट अभी तक तय नहीं हो पाई है। वहीं हांसी और भिवानी रोड पर बनने वाले आरओबी और मिनी बाईपास पर अंडर पास पर भी काम शुरू नहीं हो पाया है। अब मुख्यमंत्री के दौरे से जींद की जनता को विकास की उम्मीद है। भाजपा की सरकार बनने के बाद से ही सरकार मान रही है कि पिछली सरकारों में जींद के साथ विकास के मामले में भेदभाव हुआ है। सरकार ने हर मंच पर इस भेदभाव को दूर करने का भी वादा किया, लेकिन वादा अभी तक पूरा नहीं हो सका है। इसके पूरे होने के लिए सरकार के प्रयास क्या रंग लाएंगे, इसका इंतजार जींद की जनता को है। दरअसल मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने सरकार बनने के बाद पहली बार 06 दिसंबर 2014 को जींद में शिरकत की थी। उस समय सरकार ने जींद के लिए छह मुख्य घोषणाएं की थी। इनमें सरकारी पॉलिटेक्निक कॉलेज, ट्रांस्पोर्ट नगर, मेडिकल कॉलेज, नागरिक अस्पताल में एमआरआई मशीन और भिवानी व हांसी रोड पर आरओबी की घोषणा की थी। लोगों को तब विकास की उम्मीद बंधी थी, लेकिन समय के साथ यह उम्मीद भी फीकी पड़ती गई।  
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यह है परियोजनाओं की स्थिति
मेडिकल कॉलेज बड़ी परियोजना है। दो साल में इसके लिए सरकार सिर्फ साइट ही फाइनल कर पाई है। इसके अलावा हांसी व भिवानी रोड पर आरओबी के लिए सरकारी औपचारिकताएं ही शुरू हुई हैं। वहीं नागरिक अस्पताल में एमआरआई की स्थिति का कोई अता-पता नहीं है। ट्रांस्पोर्ट नगर के लिए कोई काम शुरू नहीं हुआ है। पॉलिटेक्निक कालेज के लिए जमीन तक नहीं तय हुई है।

पुरानी परियोजनाओं को भी संजीवनी का इंतजार
जींद के लिए बाईपास सबसे बड़ी मांग रही है। दरअसल बाईपास नहीं होने के कारण भारी वाहन भी शहर के अंदर से ही निकलते हैं। बाईपास की परियोजना पिछले 25 साल से लटक रही है। हालांकि मुख्यमंत्री की मौजूदगी में इसी साल 11 सितंबर को दोबारा भूमि पूजन हो चुका है, लेकिन यह परियोजना भी ठंडे बस्ते में है। इसके अलावा नए बस स्टैंड की साइट के लिए अधिग्रहित भूमि का मुआवजा बंट चुका है, लेकिन निर्माण की दिशा में कोई कदम नहीं बढ़ा है।
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विकास के लिए मांग करेंगे बुलंद
हालांकि सरकार को बने दो साल हो चुके हैं, लेकिन भाजपा नेता अभी तक विकास की मांग करने की ही बात कर रहे हैं। पूर्व सांसद और विधानसभा में जींद से भाजपा के प्रत्याशी रहे सुरेंद्र बरवाला के अनुसार मुख्यमंत्री के जींद में आगमन नई सौगातें मिलेंगी। बरवाला के अनुसार नई घोषणाओं के साथ-साथ हलके के गांव के विकास के लिए पुरानी घोषणाओं को भी पूरा करने की मांग की जाएगी। बरवाला के अनुसार शुगर मिल को अपग्रेड, बागवानी विभाग की 14 एकड़ जमीन पर हर्बल पार्क बनाने, नए बस स्टैंड के निर्माण कार्य को जल्द सिरे चढ़ाने और हल्के के गांव की 15 सड़कों के निर्माण की मांग की जाएगी।

शहर को ओवरहालिंग की जरूरत
शहर को संपूर्ण विकास की जरूरत है। जींद विधानसभा क्षेत्र में जींद शहर सबसे महत्वपूर्ण है। यहां ना तो पेयजल की व्यवस्था है, ना ही सीवरेज की। कॉलोनियों की गलियां खस्ता हाल हैं। पार्कों की स्थिति दयनीय है। आवारा पशुओं की भरमार है। ऐसे में तमाम विषयों पर सरकार को काम करना चाहिए।
- कर्मबीर दुहन, जन संघर्ष मंच


यात्राएं नहीं विकास करें सीएम
मुख्यमंत्री के आगम ने से विकास की उम्मीद होती है, लेकिन यहां ऐसा कुछ नहीं है। मुख्यमंत्री पहले भी चार बार जींद आ चुके हैं। विकास की सिर्फ घोषणाएं हुई हैं। विकास परियोजनाओं पर काम शुरू किए बिना कोरी घोषणाओं का कोई लाभ नहीं।
- डॉ. हरिचंद मिढ़ा, विधायक जींद।

मुख्यमंत्री बताएं जींद के लिए क्या किया
वर्तमान सरकार ने जींद में जो भी उद्घाटन किए हैं, वे कांग्रेस के समय में तैयार हुई परियोजनाएं थी। अब तक जींद में कोई विकास कार्य नहीं हुआ है। सरकार सबका साथ सबका विकास की बात कर रही है, लेकिन ये सिर्फ बातें हैं।
- प्रमोद सहवाग, कांग्रेस नेता।

हर परियोजना होगी पूरी
हर परियोजना पूरी होगी। सरकार और विशेषकर मुख्यमंत्री जींद के विकास को लेकर गंभीर हैं। जींद को प्रदेश के अन्य जिलों के बराबर लाकर खड़ा किया जाएगा। इसमें कुछ समय लग सकता है।
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- अमरपाल राणा, जिलाध्यक्ष भाजपा
 
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